बूस्टर डोज का ट्रायल शुरू, 6 महीने पहले वैक्सीन लेने वाले होंगे शामिल, नतीजों के आधार पर होगा फैसला

टीआरपी डेस्क। कोविड-19 रोधी टीके की दूसरी खुराक के छह महीने बाद ही तीसरी खुराक दी जानी चाहिए, यही सबसे सही समय है। यह कहना है ‘भारत बायोटेक’ के चीफ और भारत का पहला कोरोना रोधी टीका ‘कोवैक्सीन’ विकसित करने वाले कृष्णा एल्ला का।

उन्होंने नाक से दिए जाने वाले टीके (नेज़ल वैक्सीन) के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने जानकारी दी कि उनकी कंपनी जल्द ही नेज़ल वैक्सीन को बूस्टर खुराक के तौर पर लाने का विचार कर रही है।

उन्होंने कहा, ” दूसरी खुराक के छह महीने बाद ही तीसरी खुराक दी जानी चाहिए। तीसरी खुराक के लिए यही सबसे उचित समय है। भारत बायोटेकनाक से दिए जाने वाली टीके को ‘बूस्टर’ खुराक के तौर पर लाने का भी विचार कर रहा है। ‘नेज़ल वैक्सीन’ के महत्व के बारे में उन्होंने कहा कि पूरा विश्व ऐसे टीके चाहता है।’

एल्ला ने कहा, ”हम नाक से देने वाला टीका ला रहे हैं… हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या कोवैक्सिन की दूसरी खुराक को नाक से दिया जा सकता है, यह रणनीतिक रूप से, वैज्ञानिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि दूसरी खुराक को अगर आप नाक से देते हैं तो आप संक्रमण को फैलने से रोकते हैं।”

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‘जीका’ रोधी टीके के बारे में एल्ला ने कहा कि भारत बायोटेक ने जीका वायरस रोधी टीका बना लिया है। प्रथम चरण पूरा हो गया है। सरकार को और अधिक परीक्षण (ट्रायल) करने होंगे क्योंकि मामले अधिक हैं। उन्होंने कहा, ”हम 2014 में जीका रोधी टीका बनाने वाली विश्व की पहली कम्पनी थे।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।