Attari Wagah border closed Pakistani brides enter India for wedding
Attari Wagah border closed Pakistani brides enter India for wedding

Pakistani Brides in India: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और वाघा-अटारी बॉर्डर बंद होने से कई तय शादियां अधर में लटक गई थीं। ऐसे समय में गृह मंत्रालय की विशेष अनुमति से पाकिस्तान से करीब 150 दुल्हनें मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर के रास्ते भारत पहुंचीं। इनमें रायपुर भी उन भारतीय शहरों में शामिल रहा, जहां पाकिस्तानी दुल्हनें शादी के लिए पहुंचीं।

भारत-पाकिस्तान के बीच जमीनी सीमाएं बंद होने के कारण इन दुल्हनों के लिए भारत पहुंचना आसान नहीं था। सामान्य तौर पर भारत का वीजा रखने वाले पाकिस्तानी नागरिक वाघा बॉर्डर के जरिए आ-जा सकते थे, लेकिन सीमा बंद होने के बाद हवाई रास्ते का सहारा लेना पड़ा। अप्रैल से जून के बीच करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें अपने लगभग 450 रिश्तेदारों के साथ अलग-अलग देशों से कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर भारत के नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल जैसे शहरों में पहुंचीं।

रायपुर भी बना शादी का ठिकाना

इस पूरी कहानी में रायपुर का नाम खास है। पाकिस्तान से आने वाली दुल्हनों के लिए रायपुर भी उन शहरों में शामिल रहा, जहां पहुंचकर उन्होंने अपने भारतीय जीवनसाथी के साथ शादी की रस्में पूरी कीं। सीमा पर तनाव के बीच इन रिश्तों को मंजिल तक पहुंचाने के लिए परिवारों को लंबा और मुश्किल सफर करना पड़ा। गृह मंत्रालय की ओर से दी गई विशेष छूट के कारण इन यात्राओं का रास्ता खुल सका। हालांकि, पाकिस्तान से आने वाले रिश्तेदारों के लिए भारत में रुकने की समयसीमा तय थी। यही वजह रही कि कई शादियां सीमित मेहमानों और सादगी के साथ हुईं।

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रिश्ते पहले तय थे, लेकिन बॉर्डर ने बढ़ाया इंतजार

कई जोड़ों की सगाई और शादी की तैयारियां पहले से हो चुकी थीं। लेकिन सीमा बंद होने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत पहुंचने की थी। कुछ मामलों में दुल्हन के परिवार के सदस्य भारत नहीं आ सके और उन्हें पाकिस्तान में ही रहना पड़ा। एक मामले में सिंध के खानपुर तहसील की आरती की शादी लंबे इंतजार के बाद भारत में हुई। वह मई 2025 में वाघा बॉर्डर के करीब पहुंची थीं, लेकिन उसी दौरान अटारी गेट बंद कर दिया गया। एक साल से अधिक समय बाद वह मस्कट के रास्ते नागपुर पहुंचीं और मार्च में शादी की। वीजा पाबंदियों के कारण आरती के साथ सिर्फ उनके भाई भारत आ सके, जबकि उनके माता-पिता पाकिस्तान में ही रह गए।

पाकिस्तान से दूल्हा भी पहुंचा भारत

इस सफर में केवल दुल्हनें ही नहीं, पाकिस्तान से एक दूल्हा भी भारत आया। सिंध के घोटकी के राभेल जसवाणी अपने माता-पिता के साथ नागपुर पहुंचे, जहां उन्होंने श्रिया से शादी की। शादी के बाद से वह भारत में रह रहे हैं और बॉर्डर खुलने पर अपने माता-पिता को भी यहां लाने की उम्मीद रखते हैं। सीमा पर तनाव और बंद रास्तों के बावजूद इन रिश्तों का सफर जारी रहा। किसी ने मस्कट होकर रास्ता चुना तो किसी ने कोलंबो, ढाका, दुबई या कतर के जरिए भारत का रुख किया। रायपुर समेत कई भारतीय शहर इन सीमापार रिश्तों की नई मंजिल बने।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।