Paddy Crop Disease: धान की फसल में इन दिनों तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप किसानों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। कीटों का समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो पौधों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ धान के उत्पादन में भी कमी आ सकती है। कृषि विभाग ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी है।
तना छेदक कीट का प्रकोप खासतौर पर उस समय गंभीर हो जाता है, जब फसल में बालियां निकलने लगती हैं। इस दौरान पौधों की बालियां सफेद होकर सूखने लगती हैं और उनमें दाने विकसित नहीं हो पाते। इसे ‘व्हाइट ईयर’ यानी सफेद बाली की समस्या कहा जाता है।
पत्तियां पीली पड़ें तो तना छेदक का संकेत
धान के पौधों में तना छेदक कीट का शुरुआती प्रकोप होने पर पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधे के तने के निचले हिस्से में छोटे-छोटे छेद दिखाई दे सकते हैं। तने के अंदर पहुंचने के बाद कीट की इल्ली पौधे के ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है और तना अंदर से खोखला होने लगता है। यदि पौधे की बीच वाली कोंपल सूखने लगे या पौधे की बढ़वार अचानक रुक जाए तो किसान को तुरंत तने और पत्तियों की जांच करनी चाहिए।
बालियां सफेद होना सबसे गंभीर संकेत
फसल में बालियां निकलने के समय तना छेदक का हमला होने पर बालियां सफेद होकर सूख सकती हैं। ऐसी बालियों में दाने नहीं बनते, जिससे सीधे पैदावार पर असर पड़ता है। इसलिए खेत में एक साथ कई सफेद बालियां दिखाई दें तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किसान प्रभावित पौधों को निकालकर तने के अंदर की स्थिति की जांच कर सकते हैं और कृषि विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं।
पत्ती मोड़क कीट भी पहुंचा सकता है नुकसान
धान की फसल में पत्ती मोड़क कीट भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी हरी इल्ली धान की पत्ती को मोड़कर उसके अंदर छिप जाती है और पत्ती के हरे हिस्से को खाती है। इससे पत्तियों पर सफेद या पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। ज्यादा प्रकोप होने पर पत्तियां कागज जैसी पतली होकर सूख सकती हैं। इससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है और फसल की बढ़वार पर असर पड़ सकता है।
तना छेदक के नियंत्रण के लिए क्या करें?
कृषि विभाग की सलाह के अनुसार तना छेदक की रोकथाम के लिए क्लोरोसाइपर (क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत + साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत) का 50 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव सुझाया गया है। हालांकि किसान किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। दवा की मात्रा, पानी की मात्रा और छिड़काव का तरीका हमेशा उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही रखें।
पत्ती मोड़क के लिए ये विकल्प बताए गए
पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विभाग ने कुछ कीटनाशक विकल्प बताए हैं। इनमें से किसी एक का इस्तेमाल स्थानीय अनुशंसा के अनुसार किया जा सकता है।
- क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी: 6 से 10 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर
- एमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी: 8 से 10 ग्राम प्रति स्प्रेयर
दवा का चुनाव फसल की अवस्था और कीट के प्रकोप की गंभीरता के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करना बेहतर है। बिना सलाह के बार-बार अलग-अलग कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
ज्यादा यूरिया और जलभराव से बचें
किसानों को धान की फसल में आवश्यकता से अधिक नाइट्रोजन या यूरिया के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी जाती है। संतुलित मात्रा में उर्वरक का उपयोग फसल के लिए बेहतर रहता है। इसके साथ ही खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने की स्थिति से भी बचना चाहिए। उचित जल निकासी बनाए रखने से फसल की स्थिति बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
खेत में इन लक्षणों पर तुरंत दें ध्यान
किसानों को नियमित रूप से धान के खेत का निरीक्षण करना चाहिए। खासतौर पर इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें-
- पत्तियों का अचानक पीला पड़ना
- पौधे की बीच वाली कोंपल का सूखना
- तने में छोटे छेद दिखाई देना
- तने का अंदर से खोखला होना
- बालियों का सफेद होकर सूखना
- पत्तियों पर सफेद या पारदर्शी धारियां बनना
किसानों के लिए जरूरी सावधानी
धान में कीट नियंत्रण के लिए केवल दवा का छिड़काव ही पर्याप्त नहीं है। किसान नियमित खेत निगरानी, संतुलित उर्वरक उपयोग और उचित जल प्रबंधन पर भी ध्यान दें। किसी भी कीटनाशक का प्रयोग स्थानीय कृषि विभाग की सलाह और उत्पाद के लेबल के निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।


