Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम् के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सीधे भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर आरोप लगाने से पहले इतिहास देखकर बोलें।

भाजपा को अपना इतिहास याद करना चाहिए

खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के हालिया भाषण का हवाला देते हुए कहा कि मोदी ने नेहरू पर यह आरोप लगाया कि 1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम् के मूल गीत से कुछ पद हटा दिए। खरगे ने पलटवार किया कि भाजपा को पहले अपने अतीत की ओर देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री मोदी का भाषण सुना, उन्होंने नेहरू जी पर आरोप लगाते हुए कहा- 1937 में नेहरू जी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने मूल ‘वंदे मातरम्’ गीत से महत्वपूर्ण पद हटा दिए थे। आज भाजपा के लोग ऐसी बातें कर रहे हैं। लेकिन जब भाजपा के पुरखे श्यामा प्रसाद मुखर्जी, मुस्लिम लीग के साथ बंगाल में सरकार चला रहे थे, तब आपकी देशभक्ति कहां थी? भाजपा को अपना इतिहास पढ़ना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने सदन को गुमराह किया

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और नेहरू के बीच एक चिट्ठी का जिक्र किया, लेकिन उसमें तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। खरगे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को लेकर नेहरू जी की चिट्ठी का जिक्र किया। हमेशा की तरह उन्होंने सदन को गुमराह किया। नरेंद्र मोदी जी के आरोप तथ्य से परे हैं और लोगों को भ्रमित करने वाले हैं। सच्चाई यह है कि 16 अक्टूबर 1937 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी को पत्र लिखा और उनसे पूछा कि कांग्रेस को ‘वंदे मातरम्’ के प्रति क्या रुख अपनाना है? इसके अगले दिन नेताजी ने नेहरू जी को पत्र लिखा और सुझाव दिया कि नेहरू जी को इस विषय पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी से व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहिए।

खरगे ने RSS और BJP पर भी हमला बोला उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जी ने जब 1921 में ‘असहयोग आंदोलन’ छेड़ा, तब लाखों कांग्रेस के कार्यकर्ता, स्वतंत्रता सेनानी- भारत माता की जय, महात्मा गांधी जी की जय का नारा लगाते हुए जेल जा रहे थे। जबकि उसी समय आपके (आरएसएस-भाजपा) लोग अंग्रेजों की नौकरी कर रहे थे। आज आप हमें देशभक्ति सिखा रहे हैं।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।