Farmers transplanting paddy late in the month of September in Chhattisgarh.
Farmers transplanting paddy following delayed rains. After transplanting in September, it is crucial to pay special attention to crop management.

September Paddy Farming: मानसून की बारिश खरीफ फसलों के लिए बेहद अहम होती है। खासकर धान की खेती में बारिश का समय और खेत में पानी की उपलब्धता फसल की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करती है। कई इलाकों में कम बारिश के कारण किसान समय पर धान की रोपाई नहीं कर पाते। बाद में बारिश होने पर सितंबर में भी रोपाई शुरू कर देते हैं।

छत्तीसगढ़ में भी खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए बारिश का समय महत्वपूर्ण है। ऐसे में अगर किसी इलाके में बारिश देर से होती है और खेतों में पानी उपलब्ध होता है, तो किसान देर से रोपाई का विकल्प चुन सकते हैं। लेकिन सितंबर में लगाई गई धान की फसल के सामने कुछ अलग चुनौतियां भी होती हैं।

सितंबर में धान की रोपाई क्यों हो रही है?

समय पर बारिश नहीं होने से किसान पहले बिचड़ा तैयार कर लेते हैं, लेकिन खेत में रोपाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। बारिश होने का इंतजार करना पड़ता है।

अगस्त में अच्छी बारिश होने के बाद खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ती है। ऐसे में जिन किसानों की रोपाई पहले नहीं हो पाई, वे सितंबर में भी धान की फसल लगाने की कोशिश करते हैं। किसानों की उम्मीद रहती है कि देर से सही, फसल तैयार हो जाए।

देर से रोपाई में सबसे बड़ी परेशानी क्या है?

धान की रोपाई देर से होने का सीधा असर फसल की अवधि पर पड़ सकता है। सितंबर में रोपाई करने पर फसल नवंबर-दिसंबर तक खेत में खड़ी रह सकती है। इसी दौरान तापमान में लगातार गिरावट शुरू हो जाती है। कम तापमान का असर धान की बढ़वार पर पड़ सकता है। कल्ले निकलने और दाना भरने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। ठंड बढ़ने पर पौधों में फुटाव और दाना बनने की क्षमता कम हो सकती है। इसका असर उत्पादन पर पड़ सकता है। यही वजह है कि देर से रोपाई करने वाले किसानों को सामान्य फसल की तुलना में प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।

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छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए इसका क्या मतलब?

छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले किसान अगर देर से रोपाई कर रहे हैं, तो सिर्फ खेत में पानी उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है। फसल की आगे की बढ़वार पर भी नजर रखनी होगी। खासकर सितंबर में रोपाई के बाद फसल किस अवस्था में पहुंच रही है और मौसम में तापमान किस तरह बदल रहा है, इस पर ध्यान देना जरूरी होगा। ठंड बढ़ने से पहले फसल को जरूरी पोषण और उचित खेत प्रबंधन देना महत्वपूर्ण रहेगा।

खाद और पोषण का रखें ध्यान

देर से लगाई गई फसल को पर्याप्त पोषण देना जरूरी है। किसान मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद का इस्तेमाल करें। पोटाश पौधों को मजबूती देने और प्रतिकूल मौसम में फसल की सहनशीलता बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि किसान अपनी तरफ से उर्वरक की मात्रा बढ़ाने के बजाय मिट्टी जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर खाद का इस्तेमाल करें।

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खेत में पानी कितना जरूरी?

देर से रोपाई की गई धान की फसल में खेत की स्थिति पर नियमित नजर रखना जरूरी है। जरूरत के मुताबिक खेत में पानी बनाए रखना होगा। इसके साथ ही पोषक तत्वों की कमी पर भी नजर रखनी होगी। फसल की नियमित निगरानी से किसान समय पर जरूरी प्रबंधन कर सकते हैं।

देर से लगी धान की फसल से फायदा क्या?

देर से रोपाई के बावजूद किसान खेत को खाली नहीं छोड़ना चाहते। इसकी एक वजह धान की फसल से मिलने वाला अतिरिक्त उपयोग भी है। धान से अनाज के अलावा पशुओं के लिए चारा भी मिलता है। इसलिए उत्पादन समय पर लगाई गई फसल की तुलना में कम होने की स्थिति में भी किसान इसे उपयोगी मानते हैं।

किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

सितंबर में धान की रोपाई कर रहे किसानों के लिए कुछ बातें खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं।

  • खेत में जरूरत के मुताबिक पानी बनाए रखें।
  • फसल की नियमित निगरानी करें।
  • पोषक तत्वों की कमी न होने दें।
  • मिट्टी की स्थिति के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद दें।
  • उर्वरक की मात्रा बढ़ाने से पहले मिट्टी जांच या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।
  • ठंड बढ़ने से पहले फसल को पर्याप्त पोषण और जरूरी खेत प्रबंधन दें।

देर से हुई बारिश किसानों के लिए धान की रोपाई का मौका जरूर दे सकती है, लेकिन सितंबर में लगाई गई फसल का प्रबंधन आसान नहीं होता। आगे तापमान गिरने से फसल की बढ़वार, कल्ले निकलने और दाना भरने पर असर पड़ सकता है। इसलिए छत्तीसगढ़ समेत ऐसे इलाकों में जहां किसान देर से धान की रोपाई कर रहे हैं, वहां पानी, पोषण और मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन पर लगातार ध्यान देना जरूरी है।

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5 FAQs

1. सितंबर में धान की रोपाई क्यों की जाती है?

समय पर बारिश नहीं होने के कारण जिन किसानों की धान की रोपाई नहीं हो पाती, वे बाद में बारिश और खेत में पानी उपलब्ध होने पर सितंबर में रोपाई करते हैं।

2. सितंबर में धान लगाने से क्या नुकसान हो सकता है?

देर से रोपाई होने पर फसल नवंबर-दिसंबर तक खेत में खड़ी रह सकती है। इस दौरान तापमान गिरने से बढ़वार, कल्ले निकलने और दाना भरने पर असर पड़ सकता है।

3. देर से लगाई गई धान की फसल में खाद कैसे दें?

मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद देना चाहिए। उर्वरक की मात्रा मिट्टी जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर तय करना बेहतर है।

4. पोटाश धान की फसल में क्यों उपयोगी हो सकता है?

पोटाश पौधों को मजबूती देने और प्रतिकूल मौसम में फसल की सहनशीलता बढ़ाने में मदद कर सकता है।

5. सितंबर में धान लगाने वाले किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

किसानों को खेत में जरूरत के मुताबिक पानी बनाए रखना चाहिए, फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए और पोषक तत्वों की कमी नहीं होने देनी चाहिए।