नई दिल्ली। अमित शाह ने आज गृह मंत्रालय का कामकाज संभाल लिया। ऐसे में सवाल तो यही है कि क्या अब पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनसीआर) लागू होगा? क्या वहां रह रहे 1 करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा जाएगा? ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह मिलकर एनआरसी के जरिए घुसपैठियों को भारत से बाहर करने की हुंकार भरते रहे हैं।

बंगाल के सिलीगुड़ी में एक सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पड़ोसी देशों के शरणार्थियों को न्याय का भरोसा देते हुए कहा था कि उत्तर बंगाल में गोरखा समुदाय को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से नुकसान नहीं पहुंचेगा, लेकिन घुसपैठियों को किसी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। सियासी आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में 1 करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठिए रह रहे हैं।

सत्ता में आने पर एनसीआर का किया था वादा:

पीएम मोदी से पहले अमित शाह ने अलीद्वारपुर की एक सभा में कहा था कि अगर भाजपा केंद्र की सत्ता में आई तो मोदी सरकार बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का क्रियान्वयन करेगी । सभी घुसपैठियों को राज्य से बाहर करेगी।

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ममता बनर्जी को घेरते हुए शाह ने कहा था कि ममता बनर्जी सोचती हैं कि उन्हें घुसपैठियों से चुनाव में मदद मिलेगी। मोदी सरकार सत्ता में आएगी तो हम बंगाल में एनआरसी लाएंगे, हर घुसपैठिए की पहचान की जाएगी और उसे बाहर किया जाएगा।

असम में लागू है एनआरसी:

शाह ये भी कहते रहे हैं कि हिंदू व बौद्ध शरणार्थियों को देश छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है। असम में एनआरसी लागू हो गया है। 30 जुलाई 2018 को एनआरसी जारी किया गया था, जिसमें कुल 3.30 करोड़ की आबादी में से 2,89,83,677 लोगों को नागरिकता रजिस्टर में शामिल किया गया था। इनमें जो लोग छूट गए थे, उन्हें फिर से इस प्रक्रिया में शामिल होने का मौका दिया गया है।

यही एनआरसी बंगाल में लागू करने की बात की जा रही है और बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को बाहर करने का दावा किया जा रहा है। अमित शाह चुनाव प्रचार के दौरान अक्सर बंगाल में घुसपैठियों का मसला उठाते रहे हैं। साथ ही यह भी कहते रहे हैं कि जो भी हिंदू या बौद्ध शरणार्थी बाहर से आए हैं, उन्हें सम्मान दिया जाएगा जबकि बाकी घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर किया जाएगा।

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जबकि ममता बनर्जी कहती रही हैं कि एनआरसी के जरिए बीजेपी बंगाल में हिंदू और मुस्लिम के बीच मतभेद और नफरत पैदा करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह इसे सफल नहीं होने देंगी।

 

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।