टीआरपी डेस्क। Special Intensive Revision : भारत निर्वाचन आयोग देशभर में मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अभियान चला रहा है, जिसे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ या SIR कहा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य डुप्लीकेट नामों को हटाना, मृत मतदाताओं के नाम काटना और नए पात्र मतदाताओं का नामांकन करना है।

यह प्रक्रिया विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। इस अभियान में एक महत्वपूर्ण पहलू 2003 की मतदाता सूची को एक संदर्भ बिंदु यानी रेफरेंस के रूप में इस्तेमाल करना है।

ऐसे में कई मतदाताओं के मन में सवाल उठ रहा है कि यदि उनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है, तो क्या उनका नाम नई सूची से हट जाएगा? ऐसा बिल्कुल नहीं होगा, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 2003 की सूची एकमात्र स्वीकार्य प्रमाण नहीं है। यदि आपका नाम उस सूची में नहीं है, तो आप अन्य वैकल्पिक दस्तावेज जमा करके अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।

समझें पूरी प्रक्रिया

SIR एक विशेष ड्राइव है जिसके तहत बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी को Verify और Update कर रहे हैं। इसका लक्ष्य एक स्वच्छ और भ्रष्टाचार-मुक्त मतदाता सूची तैयार करना है, जैसा कि हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले किया गया था। मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में यह कवायद 22 साल बाद हो रही है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है।

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सबसे पहले वोटर लिस्ट में चेक करें नाम

अपनी वर्तमान स्थिति जानने के लिए सबसे पहले यह जांच लें कि आपका नाम 2003 मतदाता सूची में है या नहीं।

  • भारत निर्वाचन आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट https://voters.eci.gov.in पर जाएं।
  • अपना राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र चुनें और अपनी डिटेल्स (नाम, पिता/माता का नाम, उम्र आदि) डालकर खोजें।
  • यदि नाम मिल जाता है, तो अपना भाग संख्या (Part Number), क्रम संख्या (Serial Number) और अन्य विवरण नोट कर लें।
  • यदि नाम नहीं मिलता है या आपको लगता है कि जानकारी गलत है, तो आप सीधे अपने क्षेत्र के बीएलओ (BLO) या निर्वाचन पंजीयन अधिकारी (ERO) से संपर्क कर सकते हैं। उनका संपर्क नंबर भी ECI की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

2003 की लिस्ट में नाम न होने पर क्या करें?

यदि आपका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, तो आपको अपने वर्तमान निवास और पहचान साबित करने के लिए निम्नलिखित में से कोई एक दस्तावेज जमा करना होगा। इन दस्तावेजों को चुनाव आयोग द्वारा स्वीकार किया गया है:

  • पुराना मतदाता पहचान पत्र : 1 जनवरी 1987 से लेकर 1 सितंबर 2002 के बीच जारी किया गया कोई भी पुराना वोटर ID कार्ड।
  • सरकारी निवास प्रमाण : राज्य/केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) द्वारा जारी कोई भी निवास प्रमाण पत्र।
  • संपत्ति संबंधी दस्तावेज : जमीन का वैध पट्टा (Lease Deed), स्वामित्व का दस्तावेज (Registry) या किराए का एग्रीमेंट।
  • बैंक/पोस्ट ऑफिस बचत पासबुक : जिस पर आपका वर्तमान पता लिखा हो।
  • शैक्षणिक प्रमाण पत्र : किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान द्वारा 1 सितंबर, 2002 से पहले जारी किया गया मार्कशीट या प्रमाण पत्र।
  • अन्य सरकारी दस्तावेज : राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट।
  • अन्य प्रमाण : कोई भी ऐसा दस्तावेज जो किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया हो और आपके निरंतर निवास को दर्शाता हो।
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ध्यान रखें की SIR के लिए आमतौर पर इनमें से केवल एक दस्तावेज की ही आवश्यकता होती है।

मध्य प्रदेश के लिए विशेष नियम

मध्य प्रदेश में SIR प्रक्रिया को लेकर कुछ विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं

  • यदि आपका नाम 2003 की सूची में है:
    आपको किसी भी दस्तावेज की जरूरत नहीं है। आपको केवल BLO द्वारा दिए गए फॉर्म पर अपनी जानकारी की पुष्टि करके और गणना प्रपत्र (Enumeration Form) भरकर जमा करना है।
  • यदि आपके माता या पिता का नाम 2003 की सूची में है:
    भले ही आपका जन्म 1987 के पहले या बाद में हुआ हो, आपको किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता नहीं है। आपको केवल अपने माता-पिता का मतदाता पहचान पत्र नंबर (EPIC Number) बताना होगा।
  • यदि आप 1987 के बाद पैदा हुए हैं और आपका नाम 2003 के बाद सूची में डला है:
    आपको यह साबित करने के लिए दस्तावेज दिखाने होंगे कि आप भारतीय नागरिक हैं और आपके माता-पिता का नाम 2003 से पहले किसी सूची में था।
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Special Intensive Revision : SIR एक जन-हितैषी अभियान है जिसका लक्ष्य हर पात्र नागरिक को मताधिकार दिलाना है। यदि आपका नाम 2003 की सूची में नहीं है, तो यह चिंता का विषय नहीं है। बस ऊपर बताए गए दस्तावेजों में से कोई एक तैयार रखें और अपने क्षेत्र के BLO का सहयोग करें। अपने मताधिकार का संरक्षण करें और इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें।