टीआरपी डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग (EC) से उस जनहित याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1,200 से बढ़ाकर 1,500 करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अदालत ने इस मामले पर चिंता जताते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह इस निर्णय के पीछे के तर्क को स्पष्ट करे।

तीन सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह को आदेश दिया कि वह तीन सप्ताह के भीतर एक संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करें। इसमें फैसले का आधार और राजनीतिक दलों से परामर्श की प्रक्रिया का विवरण प्रस्तुत किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इंदु प्रकाश सिंह को अगली सुनवाई से पहले चुनाव आयोग के हलफनामे की एक प्रति प्रदान की जाए।

जनवरी 2025 में होगी अगली सुनवाई

पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की है। जनहित याचिका में अगस्त 2024 में चुनाव आयोग द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह फैसला बिना किसी डेटा या ठोस आधार के लिया गया और यह मनमाना है।

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चुनाव आयोग की दलील

चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि राजनीतिक दलों से परामर्श के बाद ही यह निर्णय लिया गया। इसके अलावा, मतदाताओं को हमेशा निर्धारित समय के बाद भी वोट डालने की अनुमति दी जाती है।

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