टीआरपी डेस्क। दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता को गंभीरता से लेते हुए एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने की मांग संबंधी याचिका पर केंद्र सरकार को 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

इससे पहले बुधवार को हाई कोर्ट ने जीएसटी काउंसिल से कहा था कि वह शीघ्र बैठक कर एयर प्यूरीफायर पर लगने वाले जीएसटी को कम करने या पूरी तरह समाप्त करने पर विचार करे। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।

कोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब श्रेणी में है और स्थिति इमरजेंसी जैसी बनी हुई है, तब भी एयर प्यूरीफायर पर टैक्स में राहत के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। पीठ ने टिप्पणी की कि यदि नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम किया जाना चाहिए। वर्तमान में इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जा रहा है, जबकि याचिका में इसे मेडिकल डिवाइस मानते हुए 5 प्रतिशत स्लैब में लाने की मांग की गई है।

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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कपिल मदान ने दलील दी कि दिल्ली में गंभीर प्रदूषण की स्थिति में एयर प्यूरीफायर को लग्जरी वस्तु नहीं माना जा सकता। साफ इनडोर हवा अब स्वास्थ्य और जीवन के लिए अनिवार्य हो चुकी है। याचिका में यह भी कहा गया कि सबसे ऊंची जीएसटी स्लैब लगाने से एयर प्यूरीफायर आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाता है, जो मनमाना और असंवैधानिक है।