मानसून सत्र: विपक्षी दलों के हंगामे से करदाताओं के 133 करोड़ रुपये से ज्यादा हुए बर्बाद, नहीं पारित हो पाए अधिकांश विधेयक

नेशनल डेस्क। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण कल यानि सोमवार से सभी कोरोना महामारी उपायों के साथ शुरू होगा। चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए चल रहे प्रचार के बीच यह चरण महीने भर चलेगा।

सत्र के दूसरे चरण में सरकार का ध्यान मुख्य रूप से वित्त विधेयक और वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अनुदान की अनेक अनुपूरक मांगों को पारित कराने पर होगा। इन अनिवार्य एजेंडा के अलावा, सरकार ने इस सत्र में कई विधेयकों को भी पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया है।

इस बार सांसदों के लिए टीकाकरण केंद्र

संसद परिसर के अंदर सांसदों के लिए एक टीकाकरण केंद्र स्थापित किया गया है। लोकसभा के एक बुलेटिन में कहा गया है कि संसद सदस्यों के कल्याण के लिए मंगलवार 9 मार्च से संसद भवन मेडिकल सेंटर में एक COVID-19 टीकाकरण केंद्र स्थापित किया गया है। 60 वर्ष से अधिक आयु के संसद सदस्य राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के वर्तमान चरण में टीका लगाने के लिए पात्र हैं। 45 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्ति, जिन्हें कोरोना का खतरा है वे कोरोना वैक्सीन लगवाने के पात्र हैं। संसदीय आंकड़ों के अनुसार लोकसभा के 36 प्रतिशत सांसद और राज्यसभा के 62 प्रतिशत सांसद 60 वर्ष से अधिक आयु के हैं।

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आठ अप्रैल को होगा समापन

इस सत्र का समापन आठ अप्रैल को होगा। सरकार ने जिन विधेयकों को सूचीबद्ध किया है उनमें पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, राष्ट्रीय वित्त पोषण अवसंरचना और विकास बैंक विधेयक, विद्युत (संशोधन) विधेयक, क्रिप्टो करेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा नियमन विधेयक शामिल हैं। बजट सत्र का दूसरा चरण ऐसे समय हो रहा है जब सभी सियासी दलों का ध्यान पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों पर है।

29 जनवरी को हुआ था पहला चरण

इन राज्यों में मार्च-अप्रैल में चुनाव होने हैं। अनुमान है कि चुनाव प्रचार की खातिर कई क्षेत्रीय दलों के वरिष्ठ नेता सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहेंगे। बजट सत्र का पहला चरण 29 जनवरी को शुरू हुआ था जिसमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया था। राष्ट्रपति के अभिभाषण का कांग्रेस समेत 20 से अधिक विपक्षी दलों ने केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर बहिष्कार किया था। केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश किया गया था।

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