Sleeper Cell: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अल कायदा के स्लीपर सेल नेटवर्क का खुलासा हुआ है। आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने अलकायदा इन इंडियन सब-कांटीनेंट (AQIS) के खिलाफ शिकंजा कसा है। गिरफ्तार दो संदिग्ध आतंकियों से अहम इनपुट मिले हैं, जिसके आधार पर जुड़े दो और नए युवकों की तलाश में छापेमारी और दबिश तेज कर दी गई है।
दरअसल, ATS ने 12 और 14 सितंबर को आतंकी मोहम्मद नबील उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और मकसूद अली को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद दोनों से पूछताछ में दोनों ने कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। उनकी निशानदेही पर ATS की टीम अन्य साथियों और स्लीपर सेल के गुर्गों को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही है।
दो और आतंकियों की तलाश में ATS
ATS के मुताबिक, जिन दो नए संदिग्ध युवकों की तलाश की जा रही है, उनकी ठोस जानकारी पिछले दिनों गिरफ्तार हुए दोनों आतंकियों से मिली है। एटीएस की विशेष टीमें अब इन दोनों की निशानदेही पर उनके अन्य साथियों और स्लीपर सेल के गुर्गों को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। माना जा रहा है कि इनकी गिरफ्तारी से अलकायदा के कई अन्य राज बेनकाब हो सकते हैं।
शहजाद भट्टी के नेटवर्क पर भी कसा शिकंजा
उत्तर प्रदेश में पिछले लंबे समय से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित पाक गैंगस्टर शहजाद भट्टी अपने स्लीपर सेल के जरिए आतंकी नेटवर्क फैलाने की कोशिश कर रहा था। इस खतरे को भांपते हुए एटीएस ने पिछले छह महीनों के भीतर कुल 12 मुकदमे दर्ज किए और शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े कुल 52 संदिग्ध आतंकियों को दबोचने में सफलता हासिल की है। एटीएस की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने हाल ही में शहजाद भट्टी के इस पूरे सिंडिकेट को आधिकारिक तौर पर ‘आतंकी नेटवर्क’ घोषित कर दिया है।
मोबाइल फोन, पाकिस्तानी नंबरों की स्कैनिंग
केंद्रीय स्तर पर इस कार्रवाई से पहले ही उत्तर प्रदेश के भीतर प्रतिबंधित अलकायदा (AQIS) ने अपने स्लीपर सेल को सक्रिय करना शुरू कर दिया था। गिरफ्तार किए गए नबील और मकसूद अली इसी नेटवर्क के अहम मोहरे बताए जा रहे हैं। ATS की साइबर सेल टीम ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की डेटा रिकवरी और फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है, जिससे कई संदिग्ध फोन नंबर हाथ लगे हैं।
जांच में कई पाकिस्तानी नंबर भी मिले
जांच में सामने आया है कि इनमें कुछ पाकिस्तानी नंबर भी शामिल हैं। एटीएस के अधिकारी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि इन नंबरों का इस्तेमाल कौन कर रहा था, आरोपियों ने इनसे कब और कितनी बार बातचीत की, तथा सोशल मीडिया चैटिंग ऐप्स पर किन संदेशों का आदान-प्रदान हुआ था।
अगले साल होना है चुनाव
उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अगले साल 2027 में होना है। वर्तमान सरकार का कार्यकाल मई में खत्म होना है। वहीं, इससे पहले ही नई सरकार का गठन किया जाना है। वहीं, चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां यहां तेज हो चली हैं। सभी राजनीतिक दलों की आगामी भविष्य में कई बड़ी सभाएं भी होनी हैं। ऐसे में आतंकी संगठनों की यहां सक्रियता ने सरकार से लेकर सुरक्षाबलों की भी मुसीबतें बढ़ा दी हैं।



