Tara Coal Block: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को भारतीय जनता पार्टी की ‘कॉर्पोरेट-परस्त-नीति’ का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया है।
कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया है कि राज्य की सत्ता में आते ही भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है और छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों को चुनिंदा उद्योगपतियों की झोली में डाला जा रहा है।
आदिवासी अधिकारों और पेसा कानून की उपेक्षा का आरोप
शुक्ला के अनुसार, तारा कोल ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़िया हितों और आदिवासी समाज की पीठ में छुरा घोंपने जैसी है। पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत प्रदत्त ग्राम सभाओं के अधिकारों को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय पर्यावरण और जैव-विविधता संरक्षण खतरे में पड़ गई है।
‘मोदी की गारंटी’ और संसाधनों की लूट पर गंभीर सवाल
कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या राज्य का विकास केवल जंगलों की बलि देकर और आदिवासियों को बेघर करके ही संभव है? क्या ‘मोदी की गारंटी’ में छत्तीसगढ़ के जंगलों और खनिजों की खुली बोली लगाना भी शामिल था? नीलामी से पहले स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति और सुरक्षा रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के फैसलों का दिया हवाला
कांग्रेस ने याद दिलाया कि उनकी पूर्ववर्ती सरकार ने हमेशा जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय जनता के अधिकार को सर्वोपरि रखा। 23 जून 2023 को कांग्रेस सरकार ने तारा सहित 9 कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने का पत्र लिखा था। इसके अलावा 26 जुलाई 2022 को विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हसदेव-अरण्य में किसी भी नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे और डी-नोटिफिकेशन का जिक्र
कांग्रेस ने यह भी बताया कि 16 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर स्पष्ट किया गया था कि हसदेव-अरण्य में किसी नई खदान की आवश्यकता नहीं है। 19 अक्टूबर 2023 को केंद्र सरकार ने तारा सहित 40 कोल ब्लॉकों को डी-नोटिफाई भी कर दिया था, लेकिन सरकार बदलते ही दोबारा नीलामी कर खदान अडानी को सौंप दी गई।
- तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को कांग्रेस ने भाजपा की ‘कॉर्पोरेट-परस्त-नीति’ और छत्तीसगढ़िया हितों के खिलाफ बताया है।
- कांग्रेस के अनुसार तारा कोल ब्लॉक खदान अडानी को दे दी गई है।
- कांग्रेस सरकार ने 26 जुलाई 2022 को विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मांग की गई थी कि हसदेव-अरण्य में अब किसी भी कोल ब्लॉक का आवंटन या नीलामी न की जाए।
- कांग्रेस सरकार ने 16 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था।
- केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने 19 अक्टूबर 2023 को तारा सहित 40 कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से डी-नोटिफाई किया था।



