Vedanta Demerger: दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली Vedanta Limited अगले महीने एक बड़े बदलाव से गुजरने वाली है। कर्ज को कम करने और निवेशकों के लिए वैल्यू बढ़ाने के उद्देश्य से कंपनी खुद को पांच अलग-अलग लिस्टेड संस्थाओं में विभाजित (Demerger) करने का रहा है।

बदलने वाला है कंपनी का स्वरूप

दिसंबर में ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने के बाद, अब कंपनी का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। डिमर्जर के बाद ये पांच कंपनियां बाजार में होंगी:

Vedanta Limited: यह मूल कंपनी बनी रहेगी और मुख्य रूप से बेस मेटल्स (Base Metals) के कारोबार पर ध्यान केंद्रित करेगी।

Vedanta Aluminium: एल्युमीनियम क्षेत्र की स्वतंत्र इकाई।

Talwandi Sabo Power: बिजली उत्पादन से जुड़ी कंपनी।

Vedanta Steel and Iron: लोहा और इस्पात कारोबार।

Malco Energy: ऊर्जा क्षेत्र की विशेषज्ञ कंपनी।

मुख्य बातें और उद्देश्य

मूल्यांकन (Valuation): अनिल अग्रवाल के अनुसार, अलग होने के बाद इन पांचों कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप मौजूदा 27 अरब डॉलर से काफी अधिक होने की उम्मीद है।

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हिस्सेदारी: अग्रवाल की निजी होल्डिंग कंपनी इन सभी नई इकाइयों में लगभग 50% हिस्सेदारी बरकरार रखेगी।

कर्ज का बोझ: इस पुनर्गठन का प्राथमिक उद्देश्य समूह पर चढ़े भारी कर्ज को कम करना और प्रत्येक सेक्टर में निवेश को सुव्यवस्थित करना है।

समय सीमा: कंपनी के CFO अजय गोयल के मुताबिक, इन नई कंपनियों को मई के मध्य तक भारतीय शेयर बाजारों में लिस्ट करने का लक्ष्य है

चुनौतियां और पृष्ठभूमि

हालांकि यह योजना 2023 में ही प्रस्तावित की गई थी, लेकिन सरकार ने बकाया वसूली को लेकर चिंता जताई थी। अब सभी कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं को पार करने के बाद कंपनी इस ऐतिहासिक विभाजन की ओर बढ़ रही है।