टीआरपी डेस्क। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले उनके निवास पर आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई में बनी जांच समिति ने आरोपों को प्राथमिक रूप से सही पाया। समिति की रिपोर्ट के बाद जस्टिस वर्मा से इस्तीफे की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

अब केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। इस जिम्मेदारी को संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू को सौंपा गया है, जो विपक्ष और सहयोगी दलों के बीच आम सहमति बनाने के प्रयास में जुटे हैं।

किरेन रिजिजू का बयान

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था से जुड़ा है। इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। हम चाहते हैं कि संसद में सभी दल एकजुट होकर इस पर चर्चा करें। मैंने प्रमुख नेताओं से बातचीत शुरू कर दी है ताकि इस मुद्दे पर सर्वसम्मति बन सके।”

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महाभियोग प्रक्रिया क्या है?

भारतीय संविधान के अनुसार राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों और लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों के समर्थन से महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। इसके बाद प्रस्ताव को दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान कर रहे सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।