Naxalites spotted again in Bastar : सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा के बाद बस्तर में एक बार फिर नक्सलियों की सक्रियता की खबरों से हलचल मची हुई है। दंतेवाड़ा और बीजापुर के कुछ इलाकों में सशस्त्र नक्सलियों के देखे जाने की चर्चा है। वहीं महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में बीच सड़क पर नक्सली बैनर-पोस्टर मिलने के बाद पुलिस अलर्ट पर है।

कहां-कहां दिखे नक्सली ?

1.  बीजापुर : सूत्रों के मुताबिक कुछ दिन पहले गंगालूर इलाके में नक्सलियों का एक छोटा समूह देखा गया था।

2.  दंतेवाड़ा : जिले के कुछ क्षेत्रों में भी नक्सली मूवमेंट की चर्चा है।

3.  इंद्रावती नदी पार : नदी के पार भी नक्सलियों की सक्रियता की बात सामने आई है।

बस्तर पुलिस इस मामले में अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रही है।

महाराष्ट्र में पर्चेबाजी से बढ़ी चिंता

Naxalites spotted again in Bastar : गढ़चिरौली जिले की एटापल्ली तहसील के पिपली बुर्गी गांव के पास सड़क किनारे नक्सलियों के बैनर-पोस्टर मिले हैं। इसके बाद पुलिस ने पूरे इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

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छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा और बस्तर संभाग के कुछ इलाकों में धमकी भरे पर्चे-पोस्टर देखे जाने की पुष्टि भी हुई है। इसी घटना के बाद नक्सलवाद के खात्मे पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुलिस का दावा – आंदोलन अंतिम चरण में

Naxalites spotted again in Bastar : सुरक्षा बलों का मानना है कि नक्सलियों का 40 साल पुराना आंदोलन अब अपने अंतिम चरण में है और उनका नेटवर्क काफी सिमट गया है। आईजी बस्तर रेंज के अनुसार, नक्सलियों का प्रभाव काफी कम हो गया है और अब उनका बड़े पैमाने पर लौटना “अत्यंत दुर्लभ” है।

बस्तर में सुरक्षा और पुनर्वास की स्थिति

Naxalites spotted again in Bastar : नक्सली गतिविधियों के बीच बस्तर में सुरक्षा और विकास के काम भी जारी हैं। बस्तर में 150 से अधिक नए सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित किए गए हैं। वहीं हिंसा के कारण गांव छोड़कर गए परिवार अब वापस लौट रहे हैं और PM आवास योजना व अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं

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फिलहाल एक तरफ सरकार नक्सलवाद के खात्मे का दावा कर रही है, दूसरी तरफ सीमावर्ती इलाकों में पर्चेबाजी और छोटी-छोटी दस्तक से माहौल गरमाया हुआ है। पुलिस पूरी तरह चौकन्नी है और इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है।

FAQ 

बस्तर में बीते सालों में कुल कितने नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है? 

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन और पुनर्वास अभियानों के तहत, केवल 1 जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच ही 2,625 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। बीते कुछ वर्षों में राज्य भर में कुल 2,800 से अधिक नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है।

बस्तर में हुई मुठभेड़ों में कितने नक्सली मारे गए और कितने जवान शहीद हुए हैं? 

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच लगातार मुठभेड़ें हुई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में (2024 से 2026 तक) सुरक्षा बलों ने 500 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया है, जिनमें से 2025 में 256 और 2024 में 200 से अधिक नक्सली मारे गए थे। वहीं, इस दौरान करीब 50 से अधिक सुरक्षा बल के जवान भी शहीद हुए हैं।

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नक्सलवाद के खात्मे के बाद सरकार का क्या लक्ष्य है?

नक्सलवाद के खात्मे (मार्च 2026 में घोषित नक्सल-मुक्त भारत) के बाद सरकार का मुख्य लक्ष्य प्रभावित क्षेत्रों (विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग) में समग्र, समावेशी और दीर्घकालिक विकास करना है ताकि इन इलाकों को देश के अन्य हिस्सों के बराबर लाया जा सके।