चुनाव श्रृंखला : एक

0 श्याम वेताल

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में अब ज्यादा दिन नही बचे हैं । इनमें हिंदी पट्टी के राज्य छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव की सरगर्मी चरम की ओर है । इन तीन राज्यों में छत्तीसगढ़ और राजस्थान की मौजूदा कांग्रेस सरकारों ने जहां अपनी सत्ता बचाने के लिए सारे घोड़े खोल दिये हैं वहीं मध्यप्रदेश में सत्ता पर एक बार फिर से काबिज होने कांग्रेस एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।

उधर, भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर तीनों राज्य हैं। भाजपा यह मानकर चल रही है कि राजस्थान जीतना अपेक्षाकृत सरल है क्योंकि वहां उसे अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ माहौल बनता नज़र आ रहा है और वहां हर पांच साल में सरकार बदलने का ट्रेंड भी बना हुआ है । इसके अलावा राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के अंदर भी कई तरह के झगड़े हैं । राज्य के दूसरे बड़े नेता सचिन पायलट की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कभी नही पटी । बग़ावत तक की नौबत आ चुकी है। राज्य में अपराध बेलगाम है और लोगों में असंतोष भी स्पष्ट दिखता है । शायद इसीलिए राज्य सरकार ने अब जनता के लिए प्रलोभनों की दुकान खोल दी है और मुफ़्त की रेवड़ी बांटने की घोषणाएं करनी शुरू कर दी है । जिस बड़े पैमाने पर प्रलोभनों का एलान हो रहा है , उससे साफ है कि कांग्रेस के मन में सत्ता जाने का डर घर कर चुका है ।

यही हाल मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार का है । भाजपा यह मानकर चल रही है कि इस बार यहां लड़ाई आसान तो कतई नही है। केंद्रीय नेतृत्व भी चिंतित है । यही वज़ह है कि पार्टी अब तक तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत सात सांसदों को विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारने की घोषणा कर चुकी है । अभी तीन ही लिस्ट आई हैं और इन प्रत्याशियों में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का नाम कहीं नही है जबकि इस पार्टी में ऐसा होता नही है कि राज्य के मुख्यमंत्री का नाम प्रत्यशियों की पहली सूची में न हो । पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को सिर्फ़ इस बात की चिंता नही है कि एक बड़ा राज्य भाजपा के हाथ से फिसलकर ‘ हाथ ‘ के हाथ मे चला जायेगा बल्कि इस नुकसान से लोकसभा के चुनाव में बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा । इस दबाव में मुख्यमंत्री राज्य की जनता को लुभाने के लिए जी – तोड़ कोशिश में लगे हैं ।

राजस्थान और मध्यप्रदेश में सत्ता के लिए चल रही मारामारी से कुछ अलग छत्तीसगढ़ की स्थिति है । छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की बहुत मजबूत सरकार है और उतनी ही मजबूत पार्टी की स्थिति है । इसीलिए राज्य की भूपेश बघेल सरकार आश्वस्त है कि सत्ता कहीं जाने वाली नही है। हालांकि पार्टी ने ‘ इस बार पचहत्तर पार ‘ का नारा दिया है लेकिन राजनीति के जानकर मानते हैं कि इस बार पार्टी को पहले की अपेक्षा कम सीटों पर संतोष करना पड़ेगा । फिर भी बहुमत तो अवश्य मिलेगा और कांग्रेस सत्ता में बनी रहेगी।

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आज की स्थिति तो यही है । अगले दो महीनों में कोई बड़ा चमत्कार हुआ तो परिस्थितियों में बदलाव की संभावना से इनकार भी नही किया जा सकता है, क्योंकि राज्य में 15 साल शासन में रही भाजपा कमर कस कर भूपेश सरकार को सत्ता से बाहर करने पर तुली हुई है। पार्टी की प्रदेश इकाई को केंद्र का पूरा सहयोग और निर्देशन प्राप्त हो रहा है । कई – कई केंद्रीय मंत्री राज्य का दौरा कर रहे हैं । एक न एक मंत्री आये दिन छत्तीसगढ़ में रहता ही है और अमित शाह के भी 5 दौरे हाल के दिनों में हो चुके हैं । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी दो जनसभाएं शीघ्र ही होने वाली हैं । राज्य में सत्ता परिवर्तन के लिए कटिबद्ध भाजपा की प्रचार – गति देखकर कांग्रेस में खलबली है और होनी भी चाहिए क्योंकि सत्ता बचानी है तो चिंता तो करनी ही पड़ेगी।

बहरहाल, हिंदी पट्टी के इन तीन राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर मौजूदा सरकारें हिली हुई हैं। इनमे मध्यप्रदेश और राजस्थान की क्रमशः भाजपा और कांग्रेस की सरकारों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है जबकि छत्तीसगढ़ अभी तक खतरे से दूर है ।

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