Cockroach Janata Party demands resignation of Chief Election Commissioner
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जुड़े मामलों पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

CJP New Ultimatum: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच 48 घंटे के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है। तय समय में इस्तीफा न देने पर एक बार फिर से जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन करने के साथ ही देशव्यापी आंदोलन की भी चेतावनी दी है।

CJP का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के जरिए देशभर में 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। वहीं, चुनाव आयोग के भीतर आए मतभेद के पूरी तरह से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को दोषी ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।

लोकतंत्र नहीं ऑटॉक्रेसी चल रही है: सीजेपी

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट्स गंभीर हैं। लोकतंत्र का मतलब जनता द्वारा सरकार चुनना है, लेकिन मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में यह तय किया जा रहा है कि किसे वोट डालने की अनुमति मिलेगी और किसे नहीं। जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि ऑटोक्रेसी (तानाशाही) है।

13 करोड़ वोट डिलीट होने पर सवाल

CJP ने दावा किया कि कुल 13 करोड़ से ज्यादा वोट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जो कि कोई छोटी संख्या नहीं है। 2024 लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी और विपक्षी गठबंधन के बीच वोटों का अंतर सिर्फ 2% था। 13 करोड़ वोट हटाना कुल वोटों का करीब 13 से 14% हिस्सा है। पार्टी का आरोप है कि ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, एनसीपी, पिनराई विजयन जैसे क्षेत्रीय नेताओं और मुख्यमंत्रियों को एक-एक करके हराया गया है। यह महज संयोग नहीं, बल्कि एक तय पैटर्न है।

चुनिंदा सीटों पर असर के दावे

पार्टी का दावा है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सीट से 50 हजार वोट डिलीट किए गए और वह करीब 15 हजार वोटों से हारीं। इसके अलावा एमके स्टालिन की सीट से 1 लाख वोट हटाए गए और वह करीब 45 हजार वोटों से हारे। कुछ इसी तरह का घटनाक्रम दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के साथ भी हुआ। उनकी सीट से 40 हजार वोट डिलीट हुए और वह करीब 4 से 5 हजार वोटों से हारे।

फैसले सर्वसम्मति से हुए- चुनाव आयोग

SIR को लेकर चुनाव आयोग के बीच मतभेज के आरोपों पर पहले ही चुनाव आयोग ने अपना स्पष्टीकरण दिया है। आयोग ने कहा था कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव आना एक सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले पूरी तरह से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

14 बार आपत्तियों के बाद दी गई है सफाई

चुनाव आयोग की यह सफाई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आई। जिसमें दावा किया गया था कि अन्य दो चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) ने पिछले 10 महीनों में फॉर्म-6 में बदलाव और वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने और वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर आपत्तियों का जिक्र था। चुनाव आयोग ने इन दावों पर 8 पॉइंट में अपना जवाब दिया है।