CJP Protest Delhi: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर 75 ट्रेनों को रद्द करने, 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद करने तथा हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए सीमावर्ती इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने, कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जवाबदेही तय करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया है। आम आदमी पार्टी, वामपंथी दलों और ममता बनर्जी की पार्टी ने भी इस प्रदर्शन को समर्थन देने की घोषणा की है। पार्टी की ओर से समर्थकों से सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अपने सहयोगियों सौरभ दास और आशुतोष रांका समेत अन्य समर्थकों के साथ दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी में हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है।
अभिजीत दीपके का ऐलान- जहां रोकेंगे, वहीं जंतर-मंतर
प्रदर्शन को लेकर अभिजीत दीपके ने साफ कहा है कि उन्हें जहां रोका जाएगा, वही उनके लिए जंतर-मंतर होगा। उन्होंने जेल जाने के लिए भी तैयार रहने की बात कही है। दीपके का कहना है कि विरोध प्रदर्शन होकर रहेगा। उन्होंने सुबह सोशल मीडिया पर लिखा, “जिंदगी जीने के दो ही तरीके होते हैं…एक जो हो रहा है, होने दो, बर्दाश्त करते जाओ…या फिर जिम्मेदारी उठाओ उसे बदलने की।” उनके इस बयान के बाद प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
दिल्ली में 23 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, चप्पे-चप्पे पर निगरानी
CJP के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। करीब 23 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी दी गई है। जंतर-मंतर, जनपथ, कनॉट प्लेस और संसद मार्ग की ओर जाने वाले रास्तों पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को निषेधाज्ञा की जानकारी देते हुए निर्धारित क्षेत्र में जमा नहीं होने की चेतावनी दे रही है। कई स्थानों पर आवाजाही नियंत्रित की गई है। पुलिसकर्मियों की वर्दी पर बॉडी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि रैपिड एक्शन फोर्स के वाहन और बसें भी तैनात रखी गई हैं।
75 ट्रेनें रद्द, 45 मेट्रो स्टेशन बंद
प्रदर्शन के मद्देनजर रेल और मेट्रो सेवाओं पर भी असर पड़ने की जानकारी सामने आई है। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली कुछ विशेष और मेल ट्रेनों को रद्द किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दोपहर 2 बजे तक 75 ट्रेनें रद्द थीं। इसके अलावा, 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किए जाने की बात कही गई है। जंतर-मंतर के आसपास नई दिल्ली जिले में करीब चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने की भी जानकारी है। शराब की दुकानों को बंद रखने के आदेश और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए निरोध केंद्र तैयार किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?
दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के पीछे आवेदन में देरी को प्रमुख वजह बताया गया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को किया गया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत करीब 10 दिन पहले आवेदन देना जरूरी बताया गया है। इसके अलावा, नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने का हवाला दिया गया है। प्रशासन का तर्क है कि सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध जरूरी हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठा आम लोगों की परेशानी का मुद्दा
प्रदर्शन को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों और आम नागरिकों को हो रही परेशानी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में भी उठा। दलील दी गई कि केवल आशंका के आधार पर परिवहन सेवाओं और दूसरी सुविधाओं को बंद करने से आम लोगों को परेशानी हो सकती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पहले के एक प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि 20 जून को प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी और अनुमति दी भी गई थी। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने एक दिन की अनुमति मिलने के बावजूद 17 दिनों तक धरना जारी रखा और संसद की ओर जाने की कोशिश भी की। उन्हें रोकने के दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी अदालत में रखी गई।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- आम लोगों को नहीं होनी चाहिए परेशानी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन और आम नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। अदालत की टिप्पणियों में यह बात प्रमुख रही कि छोटी आशंका से निपटने के लिए जरूरत से ज्यादा सख्त कदम नहीं उठाए जाने चाहिए। अदालत ने नागरिकों के परिवहन के अधिकार, मेट्रो स्टेशन और ट्रेनों पर लगाए गए प्रतिबंधों पर दोबारा विचार करने तथा आम लोगों को अनावश्यक असुविधा से बचाने की जरूरत पर जोर दिया। प्रदर्शन के लिए बड़े और उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने पर विचार करने की बात भी सामने आई।
नोएडा में 20 अक्टूबर तक धारा 163 लागू
दिल्ली में प्रदर्शन के बीच गौतमबुद्धनगर यानी नोएडा में भी सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। जिले में 20 अक्टूबर तक धारा 163 लागू किए जाने की जानकारी है। नवरात्र, परीक्षाओं और किसान संगठनों के संभावित धरना-प्रदर्शनों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।



