INDIA Block Ramlila Maidan Rally: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी राजनीतिक दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने एक विशाल जनसभा का आयोजन कर शक्ति प्रदर्शन किया। इस महारैली के माध्यम से विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए।
रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल की नहीं है, बल्कि देश के युवाओं, किसानों, मजदूरों, लोकतंत्र और संविधान को बचाने की साझा आवाज है।
ज्ञानेश कुमार के बिना मोदी-शाह का सत्ता में आना असंभव: राहुल गांधी
मंच से जनसमूह को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा, “ज्ञानेश कुमार के बिना न तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनते और न ही अमित शाह गृह मंत्री।” उन्होंने आगे दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटना होगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं—चाहे वह चुनाव आयोग हो, न्यायपालिका हो या जांच एजेंसियां—को कैप्चर कर लिया गया है और जनता के वोटों की अधिकारों की चोरी की जा रही है।

‘अदाणी और 2-3 लोगों का देश नहीं बनने देंगे’
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में देश के आर्थिक ढांचे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की बुनियादी सुविधाओं, हवाई अड्डों, रेलवे, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों में सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमें 2-3 लोगों का देश नहीं चाहिए, जहां सब कुछ अदाणी जी का हो। हम देश की संपत्ति को इस तरह छिनने नहीं देंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति विशेष से नफरत नहीं करते हैं, लेकिन देश के संविधान और लोकतंत्र पर हमला करने वालों को जनता के सामने जवाबदेह बनना ही पड़ेगा।
हिंसा के खिलाफ और आखिरी व्यक्ति की आवाज की रक्षा का संकल्प
महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हमारा धर्म पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति की आवाज की रक्षा करना है, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या वर्ग का हो। उन्होंने कहा कि देश में फैलाए जा रहे नफरत के माहौल के बीच जनता अब भाईचारा और मोहब्बत चाहती है। उन्होंने दोहराया कि विपक्षी गठबंधन पूरी तरह से अहिंसक और संवैधानिक तरीके से जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ेगा और सरकार को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने पर मजबूर करेगा।
‘जमीन बची नहीं, अंगद का पैर कहां रखोगे’: अखिलेश यादव
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने का आरोप लगाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो लोग दावा करते हैं कि वे अंगद का पैर हैं, वे जान लें कि जब जमीन ही नहीं बची तो पैर कहां रखोगे?” उन्होंने रामलीला मैदान की इस रैली को ‘लोकतंत्र की हल्दीघाटी’ करार दिया और कहा कि यूपी की जनता जिस तरह स्वागत करती है, विदाई भी उससे कहीं ज्यादा शानदार अंदाज में करती है। अखिलेश यादव ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बदलाव का आह्वान किया।

‘मोदी जाएंगे तभी बचेगा लोकतंत्र’: मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईडी, सीबीआई जैसी संस्थाओं के जरिए विपक्ष को डराने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। खरगे ने कहा कि देश के लोकतंत्र और संविधान को सुरक्षित रखने के लिए सत्ता में बदलाव बेहद जरूरी है। उन्होंने विभिन्न राज्यों में चल रही राजनीतिक गतिविधियों का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं से लोकतंत्र की मजबूती के लिए सड़क पर उतरकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

ईवीएम, एसआईआर और मतगणना पर ममता बनर्जी का हमला
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधा। ममता ने कहा, “हम हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है।” उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और ईवीएम (EVM) पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इन प्रक्रियाओं का इस्तेमाल सत्ताधारी दल को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की जोरदार मांग की और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग का समर्थन किया।
तेजस्वी यादव ने भी उठाया ‘वोट चोरी’ का मुद्दा
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने रैली में कथित वोट चोरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देश में मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की शुरुआत बिहार से हुई थी और अब यह पूरे देश का मुद्दा बन चुका है। तेजस्वी ने सरकार की नीतियों को आम जनता और युवाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन इस पूरी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर जनता के बीच जाएगा और राजनीतिक बहस के केंद्र में लोकतंत्र की रक्षा के मुद्दे को रखेगा।
संस्थाओं की स्वायत्तता और संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा
महारैली के दौरान सभी घटक दलों के शीर्ष नेताओं ने एक स्वर में कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता खतरे में है। नेताओं का तर्क था कि जब तक चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं करेंगी, तब तक पारदर्शी चुनाव संभव नहीं हैं। मंच से सभी वक्ताओं ने जनता से अपील की कि वे अपने मतदान के अधिकार और संविधान द्वारा दी गई आजादी की रक्षा के लिए सजग रहें।
परिवर्तन का संदेश लेकर समाप्त हुई महारैली
रामलीला मैदान में जुटी विशाल भीड़ को देखते हुए विपक्षी नेताओं ने इसे देश में बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत बताया। रैली के अंत में संकल्प लिया गया कि ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी दल मिलकर देश के विभिन्न हिस्सों में इस आंदोलन को आगे ले जाएंगे। विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह जनसभा सिर्फ एक शक्ति प्रदर्शन नहीं है, बल्कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी अभियान का पहला कदम है।



