बेंगलुरु। आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए एक बार फिर लामबंद हो रहे हैं। इसी कड़ी में बेंगलुरु में कांग्रेस के आह्वान पर सोमवार से दो दिवसीय बैठक बुलाई गई है। विपक्षी दलों की दूसरी बैठक आज से शुरू हो रही है। इसमें 26 पार्टियों के शामिल होने की संभावना है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 नए दलों को न्योता दिया है। ये बैठक पहले शिमला में होने वाली थी, लेकिन हिमाचल में पिछले दिनों से जारी भारी बारिश की वजह से जगह बदली गई। विपक्षी एकता बैठक में पहली बार सोनिया गांधी शामिल हो सकती हैं। मीटिंग से पहले वो सोमवार को विपक्षी नेताओं के लिए डिनर होस्ट कर सकती हैं। हालांकि, घुटने में चोट के चलते पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डिनर में शामिल नहीं हो पाएंगी। वहीं, शरद पवार भी आज शामिल नहीं होंगे। दोनों नेता कल बैठक में मौजूद रहेंगे।

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पहली बैठक 24 दिन पहले 23 जून को बिहार के CM नीतीश कुमार ने पटना में बुलाई थी, जिसमें 17 राजनीतिक दल शामिल हुए थे। इस बार विपक्षी कुनबे को और मजबूत करने के लिए 8 और दलों को न्योता भेजा गया है। उधर, NDA ने भी 18 जुलाई को बैठक बुलाई है। ऐसा कहा जा रहा है कि इसमें 30 पार्टियां सरकार के साथ दिखेंगी। इसके लिए भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने NDA के सहयोगियों को आमंत्रण पत्र भेजना शुरू कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि, पटना में हुई बैठक में 17 दलों के नेता शामिल हुए थे। इस बार विपक्षी कुनबे को और मजबूत करने के लिए 8 और दलों को न्योता भेजा गया है। इनमें ​​​​मरूमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, कोंगु देसा मक्कल काची, विदुथलाई चिरुथिगल काची, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (जोसेफ) और केरल कांग्रेस (मणि) ने हामी भरी है। इन नई पार्टियों में से KDMK और MDMK 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान BJP की सहयोगी हुआ करती थीं। विपक्षी एकता की पहली बैठक में जनता दल यूनाइटेड (JDU), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), आम आदमी पार्टी (AAP), द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, तृणमूल कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्क्सिस्ट CPM, CPI (ML), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), सपा, JMM और NCP शामिल हुए थे।

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इस बैठक का मकसद मौजूदा मोदी सरकार के खिलाफ 2024 के आम चुनाव से पहले दमदार विपक्ष तैयार करने की कोशिश है। नीतीश कुमार का कहना है कि अभी सभी पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष में प्रधानमंत्री का चेहरा कौन होगा? इस पर चर्चा नहीं की जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी टॉप अपोजिशन लीडर्स को अगली बैठक में शामिल होने के लिए न्योता भेजा था। उन्होंने चिट्ठी में लिखा था कि विपक्षी एकता को लेकर चर्चाओं को जारी रखना है।

पहले दिल्ली के CM केजरीवाल के आने पर भी संशय बना हुआ था, लेकिन कांग्रेस ने रविवार को दिल्ली में केंद्र की तरफ से लाए गए अध्यादेश के खिलाफ AAP को समर्थन देने की घोषणा कर दी। इसके बाद केजरीवाल ने मीटिंग में शामिल होने की बात कही। दरअसल, पहली बैठक में केजरीवाल ने दिल्ली में अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस के स्टैंड को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने समर्थन नहीं दिया तो वे दूसरी बैठक में नहीं आएंगे। पटना की बैठक में शामिल 15 दलों में से 12 दलों का प्रतिनिधित्व राज्यसभा में है। कांग्रेस को मिलाकर सभी 12 दलों ने केंद्र के अध्यादेश को लेकर AAP का समर्थन किया है। सभी पार्टियों ने राज्यसभा में इसका विरोध करने की बात कही है।

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