EVM Controversy: रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पाण्डेय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर करारा हमला बोला।
सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि विपक्ष देश की निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को नुकसान पहुँचाने और जनता को भ्रमित करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे देशव्यापी विकास कार्यों से ध्यान भटकाने के लिए विरोधी दल अब निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रणाली पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
कांग्रेस की चुनावी धांधलियों का जिक्र
सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि साल 1952 के पहले आम चुनाव में कांग्रेस ने कम्युनिस्टों के साथ मिलकर संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को हराने की साजिश रची थी। इसके बाद 1957 में बिहार के बेगूसराय में देश के पहले बूथ पर कब्जा करने की घटना भी कांग्रेस समर्थकों द्वारा ही अंजाम दी गई थी।
जम्मू-कश्मीर चुनाव और आपातकाल
पाण्डेय ने बताया कि 1967 में जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस ने अपने प्रतिद्वंदियों को चुनाव लड़ने से रोककर 61 सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल की थी। आगे चलकर 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी ठहराया था और 6 वर्षों के लिए अयोग्य घोषित किया था। इसके अलावा 1987 में भी नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ मिलकर चुनाव में भारी धांधली की गई थी।
वोट शेयर में भारी गिरावट से बौखलाई कांग्रेस
भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि 1952 में कांग्रेस का वोट शेयर 45% था, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर महज 21.4% रह गया है। उन्होंने कहा कि लगातार गिरते जनाधार और हार के डर से बौखलाकर कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। यही वजह है कि अब वह हार की जिम्मेदारी से बचने के लिए ‘वोट चोरी’ और ‘ईवीएम’ का झूठा बहाना बना रही है।
राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर उठे सवाल
संतोष पाण्डेय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा विदेशों में दिए जा रहे बयानों पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अमेरिका जाकर भारतीय निर्वाचन आयोग के खिलाफ झूठे बयान देते हैं, जिससे देश की संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने का प्रयास होता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग हमारे लोकतंत्र की रीढ़ और जनादेश का सच्चा संरक्षक है।
भारत के निर्वाचन आयोग की वैश्विक साख और इतिहास
भारतीय निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को रेखांकित करते हुए पाण्डेय ने कहा कि पिछले 70 वर्षों में आयोग ने 400 से अधिक विधानसभा चुनाव और 20 आम चुनाव पूरी सफलता के साथ कराए हैं। दुनिया की लगभग एक-छठे (1/6) हिस्से की आबादी के लिए चुनाव प्रबंधन का अनुभव रखने वाला यह आयोग दुनिया के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक संरक्षकों में से एक है। मोदी सरकार ने चुनाव कानून संशोधन विधेयक (2021) लाकर चुनावी सुधारों और एसआईआर (SIR) की निष्पक्ष प्रक्रिया को और मजबूत किया है।
एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस के दोहरे रवैये का पर्दाफाश
पाण्डेय ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर कांग्रेस नेताओं के दोहरे चरित्र को उजागर किया। उन्होंने केरल के पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि एसआईआर से फर्जी वोटों पर रोक लगी है। इसी तरह केरल के कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनादन और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी माना था कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची से फर्जी नाम हटाए गए हैं और यह व्यवस्था काफी उपयोगी है।
मतदाता सूची का शुद्धिकरण
भाजपा सांसद ने बताया कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण का काम कोई नया नहीं है। आजादी के बाद से अब तक 8 अलग-अलग कालखंडों में (1952-56, 1957, 1961, 1965-66, 1983-84, 1987-89, 1992-95 और 2002-2004) मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण किया जा चुका है। इनमें से अधिकांश समय देश में कांग्रेस की ही सरकारें सत्ता में थीं।
फॉर्म की प्रक्रिया से जुड़ी नियम पुस्तिका
अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21 का उल्लेख करते हुए पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। इसमें बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करते हैं। इसके बाद अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे मतदाताओं की पहचान कर नियमनुसार नाम हटाए जाते हैं। फिर प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है और आपत्तियाँ सुनने के बाद ही अंतिम सूची जारी होती है।
उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला
सांसद संतोष पाण्डेय ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट माना है कि चुनाव सिर्फ मतदान के दिन का नाम नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक और मजबूत नींव एक पारदर्शी, शुद्ध और पूरी तरह विश्वसनीय मतदाता सूची होती है।



