Shehzad Poonawalla Resign: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पूनावाला ने अपना आधिकारिक पत्र भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को सौंपते हुए इसे तत्काल स्वीकार करने का आग्रह किया है। यह कदम राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि पूनावाला पिछले कई वर्षों से विभिन्न टेलीविजन बहसों और सार्वजनिक मंचों पर पार्टी का एक प्रमुख और प्रखर चेहरा रहे हैं।
घटनाक्रम का विवरण देते हुए शहजाद पूनावाला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस्तीफे की प्रति साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि 30 जुलाई को ही उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पत्र भेजकर व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों के कारण बिना किसी शर्त के हटने की पेशकश की थी। हालांकि, शुरुआती दौर में पार्टी नेतृत्व ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी, लेकिन लंबे सोच-विचार के बाद उन्होंने संगठन से अलग होने का अंतिम निर्णय दोहराया है।

इस्तीफे के पीछे की क्या है वजह ?
सूत्रों के अनुसार, शहजाद पूनावाला ने बीते 31 जुलाई को ही अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से भाजपा संबंधी विवरण हटा दिए थे, जिसके बाद से ही उनके पार्टी छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। अपने अंतिम पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि पिछले कुछ दिनों में हुई कुछ घटनाओं और संगठन से जुड़े कुछ व्यक्तियों के आचरण के कारण उन्हें इस कड़े फैसले पर कायम रहना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब निजी क्षेत्र में काम करेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और विचारों का समर्थन आगे भी करते रहेंगे।
भजापा से कब जुड़े ?
शहजाद पूनावाला वर्ष 2019 के आसपास कांग्रेस छोड़कर भाजपा के विचार-तंत्र से जुड़े थे। इसके बाद उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। राष्ट्रीय मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर पार्टी के रुख को मजबूती से रखने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। भाजपा में शामिल होने से पहले भी वे राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते थे। उनके इस अचानक अलग होने से पार्टी के मीडिया पैनल में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
भाजपा को नुकसान
शहजाद पूनावाला के इस फैसले से आगामी संगठनात्मक गतिविधियों और टीवी बहसों में भाजपा के प्रतिनिधित्व पर तात्कालिक असर पड़ सकता है। प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी हमलों का जवाब देने वाले आक्रामक प्रवक्ताओं में उनका नाम शुमार था। उनके जाने के बाद अब भाजपा मीडिया विंग में नए और युवा चेहरों को आगे लाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। वहीं, निजी क्षेत्र में लौटने के उनके बयान के बाद भी राजनीतिक गलियारों में उनके भावी कदमों पर नजरें टिकी रहेंगी।


