बिहार की सियासत में वह दिन आ गया है जिसका भाजपा समर्थकों को दशकों से इंतजार था। सम्राट चौधरी बिहार में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि सम्राट चौधरी न तो जन्मजात भाजपाई हैं और न ही उनका संघ (RSS) से कोई पुराना नाता रहा है, फिर भी अपनी आक्रामक राजनीति और समीकरण के दम पर उन्होंने सत्ता के शिखर तक का रास्ता तय किया है।

विरासत में मिली राजनीतिक

16 नवंबर, 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति का एक दिग्गज नाम रहे हैं, जो समता पार्टी के समय से नीतीश कुमार के ‘कुश’ (कोइरी) समीकरण का मुख्य चेहरा थे। मुंगेर के तारापुर (लखनपुर) के रहने वाले सम्राट के परिवार का प्रभाव मुंगेर से खगड़िया तक फैला हुआ है।

राजद से भाजपा तक का सफर

सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ बिताया और राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री भी रहे। साल 2018 में वे भाजपा में शामिल हुए और महज 7-8 सालों के भीतर उन्होंने पार्टी में अपनी ऐसी जगह बनाई कि आज वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

‘लव-कुश’ समीकरण: नीतीश की पसंद क्यों?

बिहार की राजनीति में ‘लव’ (कुर्मी) और ‘कुश’ (कोइरी) समीकरण हमेशा से सत्ता की चाबी रहा है। नीतीश कुमार स्वयं कुर्मी समाज से आते हैं, जबकि सम्राट चौधरी कोइरी (कुशवाहा) समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। भले ही पिछले कुछ सालों में दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई हो, लेकिन एनडीए की मजबूती के लिए सम्राट चौधरी नीतीश कुमार की भी पहली पसंद बने रहे।

संघर्ष से शिखर तक

जब नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ चले गए थे, तब सम्राट चौधरी ने कसम खाई थी कि जब तक नीतीश को सत्ता से नहीं हटाएंगे, तब तक अपना ‘मुरेठा’ (पगड़ी) नहीं खोलेंगे। 2024 में जब नीतीश एनडीए में लौटे, तो सम्राट उनके साथ डिप्टी सीएम बने और अब 2025 के चुनावी नतीजों के बाद वे स्वयं मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रहे हैं।

विवादों से भी रहा नाता

सम्राट चौधरी का करियर पूरी तरह निर्विवाद नहीं रहा है। उनके राजनीतिक सफर के शुरुआती दिनों में ‘उम्र विवाद’ और बाद में उनकी ‘शैक्षणिक डिग्री’ को लेकर चुनावी हलफनामे पर प्रशांत किशोर जैसे रणनीतिकारों ने सवाल उठाए थे। हालांकि, इन विवादों का उनके बढ़ते राजनीतिक कद पर कोई खास असर नहीं पड़ा।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।