रविवार, 27 सितंबर 2026 रवि, 27 सित॰ |
संस्करण:
ब्रेकिंग न्यूज़
पब्लिक इंटरेस्ट

Shaheed e Azam Bhagat Singh: शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती, जानिए 23 साल के इस महान क्रांतिकारी की दास्तान और देश के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान

Shaheed e Azam Bhagat Singh: भारत का स्वतंत्रता संग्राम अनगिनत वीरों और बलिदानियों के त्याग से सफल हुआ, जिनमें शहीद-ए-आजम भगत सिंह का नाम क्रांति और बलिदान का पर्याय माना जाता है। 28 सितंबर को उनकी 119वीं जयंती के अवसर पर हम भारत मां के उस महान सपूत को याद करते हैं, जिन्होंने मात्र 23 […]

शहीद-ए-आजम भगत सिंह
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Shaheed e Azam Bhagat Singh: भारत का स्वतंत्रता संग्राम अनगिनत वीरों और बलिदानियों के त्याग से सफल हुआ, जिनमें शहीद-ए-आजम भगत सिंह का नाम क्रांति और बलिदान का पर्याय माना जाता है। 28 सितंबर को उनकी 119वीं जयंती के अवसर पर हम भारत मां के उस महान सपूत को याद करते हैं, जिन्होंने मात्र 23 वर्ष की अल्प आयु में देश के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए।

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले (अब पाकिस्तान) के बंगा गांव में हुआ था। उनके परिवार में देशभक्ति की विरासत थी, लेकिन 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके कोमल मन को झकझोर कर रख दिया। वे अमृतसर से उस खून से सनी मिट्टी को अपनी बोतल में भरकर लाए थे, जिसने उनके भीतर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की अचूक चिंगारी प्रज्वलित कर दी।

गांधीवाद से सशस्त्र क्रांति का सफर

शुरुआत में भगत सिंह महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से गहराई से जुड़े थे, लेकिन 1922 के चौरी-चौरा कांड के बाद आंदोलन वापस लिए जाने से वे और कई अन्य युवा आहत हुए। उन्हें विश्वास हो गया कि बहरी हो चुकी अंग्रेजी हुकूमत को जगाने के लिए सिर्फ सत्याग्रह काफी नहीं है, बल्कि एक कड़े कदम की जरूरत है। इसी सोच के तहत उन्होंने ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HSRA) का दामन थामा और सशस्त्र क्रांति के मार्ग को चुना। इस नए दृष्टिकोण ने देश की आजादी की लड़ाई को एक आक्रामक और वैचारिक दिशा प्रदान की।

सांडर्स वध और सेंट्रल असेंबली बम कांड

वर्ष 1928 में साइमन कमीशन का विरोध कर रहे ‘पंजाब केसरी’ लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज में उनका निधन हो गया, जिससे क्रांतिकारियों का खून खौल उठा। भगत सिंह, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद ने लालाजी की मौत का बदला लेते हुए ब्रिटिश अधिकारी सांडर्स को मार गिराया। इसके बाद, 1929 में दमनकारी ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ का विरोध करने के लिए भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने सेंट्रल असेंबली में बम फेंका। उनका उद्देश्य किसी की जान लेना नहीं, बल्कि सोई हुई सरकार को जगाना था। वे भागे नहीं और अपनी गिरफ्तारी देकर अदालत को अपने क्रांतिकारी विचारों के प्रचार का मुख्य मंच बना लिया।

23 मार्च 1931: अमर शहादत का वह ऐतिहासिक दिन

अदालत में भगत सिंह के विचार और उनके द्वारा कही गई बातें आज भी युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उन्होंने हमेशा एक ऐसे समाज की कल्पना की जो शोषण और भेदभाव से पूरी तरह मुक्त हो। अंततः 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई। मौत के फंदे पर चढ़ते वक्त भी उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, बल्कि वे मुस्कुराते हुए ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा लगा रहे थे। उनके इस सर्वोच्च बलिदान ने पूरे देश में स्वतंत्रता की ज्वाला को और अधिक प्रचंड कर दिया।

भगत सिंह के सपनों का भारत और युवाओं के लिए प्रेरणा

भगत सिंह की 119वीं जयंती पर यह आत्मविश्लेषण करने का समय है कि क्या हम उनके सपनों के अनुरूप एक निष्पक्ष, सशक्त और प्रगतिशील भारत का निर्माण कर पाए हैं? उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि राष्ट्रसेवा और देशप्रेम से बढ़कर कोई दूसरा धर्म नहीं है। आज के युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए कि वे केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझकर देश के विकास में अपना अहम योगदान दें।

  • शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले (वर्तमान पाकिस्तान के फैसलाबाद) के बंगा गांव में हुआ था।
  • वर्ष 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के बालमन को झकझोर दिया था, जिसके बाद उनके भीतर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह की चिंगारी भड़की।
  • सेंट्रल असेंबली में भगत सिंह के साथ क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त ने बम फेंका था।
  • भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु इन तीनों महान क्रांतिकारियों को 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी।
  • भगत सिंह ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HSRA) संगठन से जुड़े हुए थे।
Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

विज्ञापन