Brucellosis Disease : पशुओं के साथ रोजाना रहने वाले पशुपालकों को ब्रुसेलोसिस के खतरे को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। यह एक जीवाणुजनित बीमारी है, जो संक्रमित पशुओं से इंसानों में भी फैल सकती है।
गाय, भैंस और बकरी जैसे पशुओं की देखभाल करने वाले लोगों में संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है। बीमारी के शुरुआती संकेत कई बार स्पष्ट नहीं होते, इसलिए पशुओं में गर्भपात या प्रजनन संबंधी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पशुओं में गर्भपात हो तो बरतें खास सावधानी
ब्रुसेलोसिस का एक प्रमुख संकेत पशुओं में गर्भपात और प्रजनन संबंधी परेशानी हो सकता है। गर्भपात के बाद निकलने वाला प्लेसेंटा और अन्य स्त्राव संक्रमित हो सकता है। इसे बिना सुरक्षा के हाथ से साफ करने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। पशुपालकों को ऐसी स्थिति में संक्रमित सामग्री को सीधे हाथ से छूने से बचना चाहिए। दस्ताने और अन्य जरूरी सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल करना बेहतर है। गर्भपात या बार-बार प्रजनन संबंधी समस्या होने पर पशु चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
घाव और आंखों के संपर्क से भी खतरा
संक्रमित पशु के रक्त, प्लेसेंटा या अन्य शारीरिक स्त्राव के संपर्क में आने से व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। हाथ या शरीर पर कट अथवा घाव होने पर जोखिम बढ़ सकता है। संक्रमित सामग्री के छींटे आंखों में पड़ने से भी संक्रमण की आशंका रहती है। इसलिए पशुओं की देखभाल करने के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। संक्रमित सामग्री के संपर्क में आने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
इंसानों में दिख सकते हैं ये लक्षण
ब्रुसेलोसिस का संक्रमण इंसान में पहुंचने के बाद बुखार, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मामलों में बुखार लंबे समय तक बना रह सकता है। पशुपालक या पशुओं के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति को लगातार बुखार, कमजोरी या शरीर में दर्द हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। डॉक्टर को यह जानकारी भी देनी चाहिए कि वह नियमित रूप से पशुओं के संपर्क में रहता है।
कच्चे दूध से भी संक्रमण का खतरा
संक्रमित पशु के कच्चे या पर्याप्त गर्म न किए गए दूध और उससे बने उत्पादों के सेवन से भी ब्रुसेलोसिस का खतरा हो सकता है। इसलिए दूध को अच्छी तरह उबालकर ही पीना चाहिए। संदिग्ध पशु के दूध या उससे बने उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर पशु चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।



