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High Court grants major relief to women excluded from police recruitment

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती में हो रही देरी पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि विशेष चिकित्सा पदों, खासकर एमडी साइकियाट्रिस्ट की भर्ती में लंबी देरी जनता के हितों को नुकसान पहुंचा रही है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में राज्य भर में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और विशेषज्ञ पदों पर भर्ती में अनावश्यक विलंब का मुद्दा उठाया गया है।

वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार

सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि छह एमडी साइकियाट्रिस्ट पदों के लिए प्रस्ताव छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को भेज दिया गया है, जो वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। प्रस्ताव 5 मार्च 2026 को भेजा गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से नियुक्त अमिकस क्यूरी ने कहा कि वित्तीय मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, इसलिए नई मंजूरी मांगना केवल औपचारिकता है और इससे भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है।

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि एमडी साइकियाट्रिस्ट पदों की भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए और किसी भी अनावश्यक विलंब से बचा जाए। पीठ ने टिप्पणी की कि, स्वास्थ्य जैसे विशेष क्षेत्र में भर्ती की देरी जनता के लिए गंभीर पूर्वाग्रह का कारण बन रही है। प्रक्रियागत आधार पर समय मांगना उचित नहीं है।

सरकार ने आश्वासन दिया कि योग्य मनोचिकित्सकों की कमी, सीमित पीजी सीटों और सख्त नियमों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। काउंसलर और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट की भर्ती चल रही है, जबकि पैथोलॉजिस्ट पद के लिए एक उम्मीदवार का चयन हो चुका है।

अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पिछली दिशानिर्देशों और भर्ती की नवीनतम स्थिति पर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
बता दें कि यह याचिका छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय लीगल सर्विस कमेटी द्वारा दायर की गई है, जिसमें राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और जनता को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।