चीनी बनाने का प्रतीकात्मक चित्र
गन्ने के रस से पारंपरिक तरीके से गुड़ और क्रिस्टलीय चीनी बनाने का ऐतिहासिक सफर।

History of Sugar: जिस चीनी के बिना आज हमारी सुबह की चाय, मिठाइयाँ और रोजमर्रा के कई व्यंजन अधूरे हैं, वह कभी दुनिया की सबसे महंगी और दुर्लभ चीजों में शामिल थी। चीनी का इतिहास करीब 8,000 ईसा पूर्व प्रशांत महासागर के द्वीप न्यू गिनी से शुरू होता है, जहाँ लोगों ने पहली बार गन्ने को घरेलू फसल के रूप में उगाया।

शुरुआत में लोग केवल गन्ने को सीधे चबाकर उसका मीठा रस लेते थे। धीरे-धीरे व्यापारी और यात्री इस पौधे को दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन और भारत लेकर आए। भारत पहुँचने के बाद गन्ने की किस्मत और इसके इस्तेमाल का तरीका हमेशा-हमेशा के लिए बदल गया।

भारत की क्रांतिकारी खोज: रस से गुड़ और चीनी (शर्करा) का निर्माण

भारत में प्राचीन काल में वैज्ञानिकों और किसानों ने गन्ने के रस को निकालकर और उसे उबालकर लंबे समय तक सुरक्षित रखने के तरीके खोजे। इसी प्रयोग से गुड़ का जन्म हुआ। इसके बाद लगभग 350 ईस्वी (गुप्त काल) के आसपास भारत में पहली बार गन्ने के रस से ठोस क्रिस्टल यानी दानेदार चीनी बनाने की जटिल तकनीक विकसित की गई।

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संस्कृत शब्द ‘शर्करा’ ही आगे चलकर अंग्रेजी का ‘Sugar’

संस्कृत के शब्द ‘शर्करा’ से ही आगे चलकर अंग्रेजी का ‘Sugar’ और अन्य भाषाओं के शब्द बने। भारत से यह मिठास और इसे बनाने की कला फारस, चीन, अरब और फिर यूरोप तक फैली, जहाँ इसे ‘मीठा नमक’ कहकर महंगे दामों में बेचा जाता था।

औद्योगिक क्रांति, चुकंदर की खोज और आधुनिक तकनीक का दौर

15वीं से 18वीं शताब्दी के दौरान कैरेबियाई देशों और ब्राजील में गन्ने के बड़े-बड़े बागान बने। हालाँकि, ठंडे यूरोपीय देशों में गन्ने की खेती कठिन होने के कारण 1747 में जर्मन वैज्ञानिकों ने चुकंदर से चीनी बनाने का तरीका खोज निकाला। 19वीं और 20वीं शताब्दी में भाप से चलने वाली मिलों और आधुनिक मशीनों ने चीनी उत्पादन को एक विशाल उद्योग में बदल दिया। आधुनिक काल में भी भारत ने 1912 में कोयंबटूर में गन्ना प्रजनन संस्थान स्थापित कर ‘Co 205’ जैसी उन्नत किस्में बनाकर विश्व भर में गन्ने की खेती को नई दिशा दी।

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FAQ

प्रश्न 1: गन्ने की खेती की शुरुआत सबसे पहले कहाँ और कब मानी जाती है?

उत्तर: गन्ने की शुरुआत करीब 8,000 ईसा पूर्व न्यू गिनी द्वीप से मानी जाती है, जहाँ लोग इसे सीधे चबाकर रस पीते थे।

प्रश्न 2: गन्ने के रस से पहली बार दानेदार (क्रिस्टल) चीनी कहाँ और कब बनाई गई?

उत्तर: लगभग 350 ईस्वी के आसपास भारत में पहली बार गन्ने के रस से क्रिस्टल चीनी बनाने की तकनीक विकसित हुई थी।

प्रश्न 3: अंग्रेजी का ‘Sugar’ शब्द किस भारतीय भाषा से प्रेरित माना जाता है?

उत्तर: ‘Sugar’ और अन्य भाषाओं के शब्द संस्कृत के ‘शर्करा’ शब्द से विकसित या जुड़े हुए माने जाते हैं।

प्रश्न 4: गन्ने के अलावा चीनी का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत कौन-सा खोजा गया?

उत्तर: गन्ने के अलावा ‘चुकंदर’ (Sugar Beet) चीनी का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बना, जिसकी खोज 1747 में जर्मनी में हुई थी।

प्रश्न 5: भारत ने आधुनिक दौर में गन्ने की खेती में क्या बड़ा योगदान दिया?

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उत्तर: भारत ने 1912 में कोयंबटूर में वैज्ञानिक प्रजनन प्रक्रिया शुरू कर ‘Co 205’ जैसी अधिक पैदावार देने वाली किस्म बनाई, जो दुनिया भर में लोकप्रिय हुई।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
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