जशपुर के मनोरा में नवरात्रि के दौरान महिषासुर की पूजा करते असुर समुदाय के लोगजशपुर के मनोरा क्षेत्र में नवरात्रि के दौरान महिषासुर की पूजा की अनोखी परंपरा।
जशपुर के मनोरा क्षेत्र में नवरात्रि के दौरान महिषासुर की पूजा की अनोखी परंपरा।

Mahishasura worship tradition: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग अंतर्गत जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड में नवरात्रि के दौरान एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। जहां पूरे देश में नवरात्रि पर मां दुर्गा की पूजा बड़ी धूमधाम से होती है, वहीं यहां का विशेष संरक्षित असुर समुदाय मां दुर्गा की पूजा से दूरी बनाकर राक्षसराज महिषासुर की पूजा करता है।

असुर समाज के लोग महिषासुर को अपना पूर्वज मानते हैं और नवरात्रि के नौ दिनों में कोई उत्सव मनाने के बजाय गहरे शोक में डूबे रहकर अपने पूर्वज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

क्या है यह परंपरा

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड में विशेष संरक्षित जनजाति असुर समुदाय निवास करता है। समुदाय के लोग खुद को महिषासुर का वंशज बताते हैं। नवरात्रि के दौरान असुर समाज मां दुर्गा की पूजा से दूरी बनाए रखता है। इस समय समुदाय अपने पूर्वज महिषासुर की पूजा और स्मरण करता है।

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क्यों मनाते हैं शोक

असुर समुदाय की मान्यता के अनुसार, देवी दुर्गा ने देवताओं के साथ छलपूर्वक उनके पूर्वज महिषासुर की हत्या की थी। इसी वजह से नवरात्रि उनके लिए उत्सव का नहीं, बल्कि अपने पूर्वज की स्मृति में श्रद्धांजलि देने का समय है। समुदाय के लोग नवरात्रि के दिनों में दुर्गा पूजा में शामिल नहीं होते। वे महिषासुर की मृत्यु को लेकर शोक व्यक्त करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

किन गांवों में रहती है यह परंपरा

जशपुर जिले के हाड़ीकोना, जरहापाठ, बुर्जुपाठ और दौनापठा गांवों में असुर जनजाति के लोग रहते हैं। समुदाय के लिए महिषासुर केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपरा का हिस्सा हैं। इसी कारण वे अपने पूर्वज महिषासुर को लेकर गर्व की भावना रखते हैं। समुदाय के लोग दिवाली और होली जैसे त्योहारों पर भैंसासुर की भी पूजा करते हैं।

नवरात्रि में नहीं करते दुर्गा पूजा

नवरात्रि के दौरान असुर समुदाय किसी तरह के दुर्गा पूजा उत्सव में शामिल नहीं होता। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस दौरान समुदाय की धार्मिक परंपराएं महिषासुर की स्मृति और पूजा पर केंद्रित रहती हैं। इस परंपरा के जरिए समुदाय अपनी मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा रहा है।

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5 FAQs

1. जशपुर में नवरात्रि के दौरान किसकी पूजा की जाती है?

जशपुर के मनोरा क्षेत्र में रहने वाला असुर समुदाय नवरात्रि के दौरान महिषासुर की पूजा करता है।

2. असुर समुदाय महिषासुर को क्या मानता है?

असुर समुदाय महिषासुर को अपना पूर्वज और अपनी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानता है।

3. असुर समुदाय दुर्गा पूजा से दूरी क्यों रखता है?

समुदाय की मान्यता है कि देवी दुर्गा ने देवताओं के साथ छलपूर्वक उनके पूर्वज महिषासुर की हत्या की थी।

4. जशपुर के किन गांवों में यह परंपरा देखने को मिलती है?

हाड़ीकोना, जरहापाठ, बुर्जुपाठ और दौनापठा गांवों में असुर जनजाति के लोग निवास करते हैं।

5. क्या असुर समुदाय दूसरे त्योहारों पर भी पूजा करता है?

दिए गए तथ्यों के अनुसार, समुदाय दिवाली और होली पर भैंसासुर की भी पूजा करता है।