रायपुर। छत्तीसगढ़ में संचालित उद्योगों में बीते एक वर्ष में हुए अलग-अलग हादसों में 124 श्रमिकों की मौत हो चुकी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत के सवाल पर उद्योग मंत्री लखन देवांगन ने यह जानकारी दी। इन आंकड़ों पर नजर डालें तो इससे उद्योगों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगता है।

डॉ. चरण दास महंत ने पूछा कि प्रदेश में जनवरी, 2024 से जनवरी, 2025 तक कितनी औद्योगिक दुर्घटनाएं हुई हैं ? इस दौरान कितने जान-माल की क्षति हुई? कितनी मौतें हुई? कितना मुआवजा दिया गया? मृतकों के परिजनों के पुनर्वास हेतु कारखाना प्रबंधन एवं राज्य शासन द्वारा क्या कार्य किए गए?, कितनी दुर्घटनाओं में जांच संस्थित की गई है? जांच रिपोर्ट में दुर्घटना के आधार पर शासन द्वारा क्या कार्यवाही की गई? पृथक-पृथक उद्योगवार बतावें? प्रदेश में औद्योगिक सुरक्षा हेतु कारखाना अधिनियम के अतिक्रमण के दोषी कितनी औद्योगिक इकाईयों को पाया गया? कारखाना अधिनियम के तहत क्या-क्या कार्यवाही की गई?

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इस सवाल के जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि प्रदेश में 01 जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2025 तक 171 औद्योगिक दुर्घटनाएं हुई है।इन दुर्घटनाओं में 124 श्रमिकों की मृत्यु हुई है एवं 86 श्रमिक घायल हुए है। मृत श्रमिकों के आश्रितों को 17,23,68,454 रूपये एवं घायल श्रमिकों को 60,32,342 रूपये की मुआवजा राशि का प्रदाय किया गया है। मुआवजे की जानकारी पुस्तकालय में रखे प्रपत्र ‘अ’ अनुसार है। मृतकों के परिजनों के पुनर्वास संबंधी प्रावधान नहीं होने से कोई कार्य नहीं किए गए हैं। 171 दुर्घटनाओं में जांच की गई है। जांच के दौरान पाए गए उल्लंघन हेतु की गई कार्यवाही की उद्योगवार जानकारी पुस्तकालय में रखे प्रपत्र ‘अ’ अनुसार है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर 191 कारखाने दोषी

उद्योग मंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में औद्योगिक सुरक्षा हेतु कारखाना अधिनियम के अतिक्रमण के 191 कारखानों को दोषी पाया गया। उन्होंने यह भी बताया है कि इन कारखानों के खिलाफ विभाग द्वारा कार्यवाही की गई है, जिससे संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे प्रपत्र ‘ब’ के अनुसार है।

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औद्यौगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की मॉनिटरिंग की है जिम्मेदारी

दरअसल उद्योगों की सुरक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग का जिम्मा औद्यौगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के ऊपर होता है। जिनके अफसरों को उद्योगों के निरीक्षण करना होता है। कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें इस विभाग के अधिकारियों की मॉनिटरिंग में लापरवाही के चलते उद्योगों में हादसे हुए हैं। प्रदेश में साल भर में हुए इस तरह के हादसों में मौतों का जो आंकड़ा बताया गया है, वह इस विभाग के अफसरों की लापरवाही की ओर इशारा करता है। इन हादसों से सबक लेते हुए प्रदेश के निजी और शासकीय उद्योगों की सुरक्षा व्यवस्था पर सतत निगरानी रखने की जरुरत है।