FIR registered against managers of Mangal Carbon Plant Raigarh.
A close-up of a police FIR document with a blurred background of a factory gate and safety cones

टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ के खरसिया स्थित मंगल कार्बन प्लांट में गुरुवार को हुए भीषण धमाके के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया है। फर्नेस फटने से 9 महीने के मासूम सहित 8 मजदूरों के गंभीर रूप से झुलसने के बाद, पुलिस ने प्लांट के दो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। जांच में सामने आया है कि मजदूरों की सुरक्षा को ताक पर रखकर काम कराया जा रहा था।

यह कार्रवाई औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों मजदूरों की सुरक्षा के लिहाज से नजीर बनेगी। बिना सुरक्षा उपकरणों के और खतरनाक परिस्थितियों में काम कराना न केवल अनैतिक है बल्कि अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर दंडनीय अपराध भी है।

मौत के मुंह में धकेला: बिना ठंडा किए खुलवाया फर्नेस

पीड़ित महिला आशा बाई खड़िया की शिकायत ने प्लांट प्रबंधन की डरावनी सच्चाई उजागर की है। शिकायत के अनुसार, मजदूरों से बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Safety Equipment) के काम कराया जा रहा था। यही नहीं, फर्नेस को बिना ठंडा किए ही उसका ढक्कन खुलवा दिया गया। अत्यधिक दबाव (High Pressure) होने के कारण आग की लपटें गुब्बारे की तरह बाहर निकलीं और वहां मौजूद मासूम सहित सभी 8 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया।

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इन पर गिरी गाज, दर्ज हुआ मुकदमा

खरसिया पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्लांट के दो शीर्ष पदाधिकारी रूपेश शर्मा (मुख्य प्रबंधक) और दादु महाराज उर्फ प्रेमसागर त्रिपाठी (प्रबंधक) के खिलाफ BNS की धारा 125(a), 125(b), 287, 288, 289, और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में लापरवाही से जीवन संकट में डालना और मशीनों के असुरक्षित संचालन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

घायलों की स्थिति: मासूम की हालत अब भी नाजुक

हादसे में घायल सभी 8 मजदूरों का इलाज रायगढ़ के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति शिव खड़िया और 9 माह के मासूम इंदीवर की है। पीड़ित परिवार पिछले 4 महीनों से इस कारखाने में टायर गलाकर काला तेल निकालने का काम कर रहे थे।