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Raipur: राजधानी के भाजपा पार्षद हुए लामबंद, अधिकारों में कटौती का आरोप, क्या है मामला और सांसद बृजमोहन ने इन्हें क्या दी सलाह ?

Capital’s BJP corporators upset: रायपुर नगर निगम के 40 से अधिक भाजपा पार्षद अधिकारों में कटौती और नई व्यवस्था को लेकर लामबंद हो गए हैं। पार्षदों ने सफाई व्यवस्था के केंद्रीकरण और जोन कमिश्नरों के अधिकार कम किए जाने पर आपत्ति जताई है। वहीं विकास कार्यों की धीमी रफ्तार से इनके बीच नाराजगी है। पार्षदों […]

Capital's BJP corporators upset
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Capital’s BJP corporators upset: रायपुर नगर निगम के 40 से अधिक भाजपा पार्षद अधिकारों में कटौती और नई व्यवस्था को लेकर लामबंद हो गए हैं। पार्षदों ने सफाई व्यवस्था के केंद्रीकरण और जोन कमिश्नरों के अधिकार कम किए जाने पर आपत्ति जताई है। वहीं विकास कार्यों की धीमी रफ्तार से इनके बीच नाराजगी है।

पार्षदों का कहना है कि पहले जोन कमिश्नर को जोन के वार्डों में चार लाख रुपए तक के विकास कार्य स्वीकृत करने का अधिकार था, छोटे काम स्थानीय स्तर पर हो जाते थे, अब यह व्यवस्था बंद है। विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिल रही, पहले स्मार्ट सिटी मद से होने वाले काम भी ठप हैं।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल से की मुलाकात

बताया जा रहा है कि इन सबको लेकर पार्षदों ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल से उनके मौलश्री विहार स्थित निवास पर मुलाकात की। पार्षदों ने बृजमोहन के सामने अपनी मांगें रखीं, जिस पर उन्होंने इन सभी को मुख्यमंत्री से मिलने की सलाह दी है।

सफाई की केंद्रीकृत व्यवस्था से क्या है परेशानी ?

पार्षदों ने सफाई व्यवस्था को केंद्रीकृत किए जाने पर आपत्ति जताई है। पता चला है कि शहर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था लगभग ठप्प है। ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए निगम महापौर मीनल चौबे ने अब सफाई व्यवस्था केंद्रीकृत करने की योजना तैयार की है। दरअसल पार्षदों की नाराजगी की यही वजह है। पार्षदों की दलील है कि वार्डों में सफाई व्यवस्था पर उनकी नजर रहती है, मगर नई व्यवस्था के चलते सफाई ठेकेदारों पर उनका दबाव कम हो जायेगा, जिससे व्यवस्था और भी ख़राब होगी।

हालांकि सूत्र कुछ और ही वजह बता रहे हैं। दरअसल निगम के एक वार्ड में 30 से 40 सफाई कर्मियों से काम कराने का प्रावधान है, मगर सफाई ठेकेदार चालाकी करते हैं और कुछ सफाई कर्मियों से ही काम चला लेते हैं। ऐसे में फर्जी तौर पर रखे गए सफाई कर्मियों की मजदूरी की हर महीने बंदर-बांट हो जाती है। इस हेराफेरी में कहीं न कहीं इलाके के पार्षदों का सहयोग रहता है। जाहिर है, पूरे निगम में हर माह लाखों रूपये की अफरा-तफरी हो जाती है। विपक्षी पार्षदों का आरोप है कि इसी व्यवस्था के चलते वार्डों में सफाई व्यवस्था ठप्प पड़ी हुई है।

निगम महापौर मीनल चौबे शहर की बिगड़ी हुई सफाई व्यवस्था को ठीक करने की नीयत से केंद्रीकृत व्यवस्था लाना चाहती हैं, मगर पार्षद इसका विरोध कर रहे हैं। बहरहाल इसका क्या परिणाम सामने आता है, यह देखने वाली बात होगी।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वले सवाल

Q1. पार्षद क्यों लामबंद हुए?
— अधिकारों में कटौती और नई व्यवस्था में सफाई व्यवस्था के केंद्रीकरण के विरोध में।

Q2. कितने पार्षद लामबंद हैं?
— 40 से अधिक भाजपा पार्षद।

Q3. जोन कमिश्नर के अधिकार में क्या बदला?
— पहले जोन के वार्डों में 4 लाख तक के विकास कार्य स्वीकृत कर सकते थे, अब व्यवस्था बंद।

Q4. सफाई व्यवस्था पर क्या आपत्ति?
— केंद्रीकरण से व्यवस्था प्रभावित होने का आरोप।

Q5. किससे मुलाकात की?
— सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मौलश्री विहार निवास पर, उन्होंने सीएम विष्णु देव साय से मिलने की सलाह दी।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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