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Chhattisgarh E-Bus Service: रायपुर-बिलासपुर समेत 4 शहरों में जल्द दौड़ेंगी 100 ई-बसें; महिलाएं संभालेंगी ड्राइवरिंग सीट, जानें कहां मिलेगी मुफ्त ट्रेनिंग

Chhattisgarh E-Bus Service: रायपुर-बिलासपुर समेत 4 शहरों में जल्द दौड़ेंगी 100 ई-बसें; महिलाएं संभालेंगी ड्राइवरिंग सीट, जानें कहां मिलेगी मुफ्त ट्रेनिंग
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में जल्द ही पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक बस सेवा की शुरुआत होने जा रही है।
  • खास बात यह है कि इन ई-बसों की स्टीयरिंग अब महिलाओं के हाथों में नजर आएगी।
  • केंद्र सरकार की 'पीएम ई-बस सेवा योजना' के तहत प्रदेश के चार बड़े शहरों में महिलाओं को बस चालक और कंडक्टर के तौर पर प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे 'नारी शक्ति' को रोजगार के नए और बेहतरीन अवसर मिलेंगे।
  • संचालन से जुड़ी एजेंसियां और कंपनियां महिला ड्राइवरों को इसके लिए निश्शुल्क विशेष ड्राइविंग ट्रेनिंग भी मुहैया करा रही हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में जल्द ही पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक बस सेवा की शुरुआत होने जा रही है। खास बात यह है कि इन ई-बसों की स्टीयरिंग अब महिलाओं के हाथों में नजर आएगी। केंद्र सरकार की ‘पीएम ई-बस सेवा योजना’ के तहत प्रदेश के चार बड़े शहरों में महिलाओं को बस चालक और कंडक्टर के तौर पर प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे ‘नारी शक्ति’ को रोजगार के नए और बेहतरीन अवसर मिलेंगे। संचालन से जुड़ी एजेंसियां और कंपनियां महिला ड्राइवरों को इसके लिए निश्शुल्क विशेष ड्राइविंग ट्रेनिंग भी मुहैया करा रही हैं।

प्रदेश के इन 4 शहरों में स्वीकृत हैं 240 ई-बसें

प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत छत्तीसगढ़ को कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें मिली हैं, जिनका डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से तैयार किया जा रहा है।

रायपुर:- 100 ई-बसें
बिलासपुर:- 50 ई-बसें
दुर्ग-भिलाई:- 50 ई-बसें
कोरबा:- 40 ई-बसें

ई-बस चलाना है बेहद आसान, ऑटोमैटिक होता है ट्रांसमिशन

विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों को चलाना काफी आसान होता है। इनमें ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन होने के कारण बार-बार गियर बदलने का झंझट नहीं होता और पूरा नियंत्रण डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए होता है। हालांकि, महिलाओं के पास भारी वाणिज्यिक वाहन (HMV) का वैध लाइसेंस, जरूरी तकनीकी ट्रेनिंग और ड्राइविंग का अनुभव होना अनिवार्य रखा गया है।

दिल्ली और नागपुर की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में पहल

सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी का यह मॉडल देश के कई अन्य राज्यों में पहले से ही बेहद सफल रहा है। ओडिशा के भुवनेश्वर में ‘मो बस’ सेवा में करीब 40% कंडक्टर महिलाएं हैं। नागपुर में 2019 से पूरी तरह महिला स्टाफ द्वारा ‘तेजस्विनी’ बसें चलाई जा रही हैं।

इसके अलावा, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) में भी 1,000 से अधिक महिला कंडक्टर और 77 से ज्यादा महिला ड्राइवर अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसी तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को महिला-फ्रेंडली और सुरक्षित बनाया जा रहा है।राज्य शहरी विकास एजेंसी (SUDA) के तहत अलग-अलग शहरों में डिपो का काम जारी है।

The Rural Press ब्यूरो
लेखक / पत्रकार:

The Rural Press ब्यूरो

सम्पादकीय डेस्क (The Rural Press Editorial Team)

द रूरल प्रेस केंद्रीय सम्पादकीय मंडल एवं राज्य ब्यूरो नेटवर्क

The Rural Press की विशेष सम्पादकीय एवं ग्रामीण खोजी पत्रकारिता टीम। जमीनी मुद्दों, कृषि संकट और निष्पक्ष जनसरोकार की विश्वसनीय रिपोर्टिंग।

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