रायपुर / बिलासपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW-ACB) रायपुर ने 5 करोड़ से अधिक के फर्जी लोन घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। इस घोटाले की विवेचना पूरी कर विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) बिलासपुर में चालान क्रमांक 84/2026 पेश किया है।
इस मामले में दो आरोपियों द्वारा किया गया घोटाला उजागर हुआ था। विश्वजीत भौमिक पिता दिलीप कुमार भौमिक (56 वर्ष) विवेकानंद नगर मोपका बिलासपुर और राहुल कुमार सिन्हा पिता स्व. मुरारी मोहन सिन्हा (45 वर्ष) तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक बैंक ऑफ बड़ौदा राजकिशोर नगर बिलासपुर, वर्तमान में गढ़सीसा शाखा जिला कच्छ गुजरात में पदस्थ, के खिलाफ IPC धारा 420, 467, 468, 471, 120-B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 12 व 13(2) के तहत चालान पेश हुआ है। यह प्रकरण बैंक ऑफ बड़ौदा रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय की शिकायत पर 28 जनवरी 2020 को दर्ज हुआ था।
कैसे किया फर्जीवाड़ा?
जांच में पाया गया कि जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय से छोटा लोन देने के नाम पर विश्वजीत भौमिक लोगों से आधार, पैन, KYC और संपत्ति के मूल दस्तावेज व कोरे चेक पर हस्ताक्षर ले लेता था। उन्हीं दस्तावेजों से बिना जानकारी के उनके नाम पर फर्में बना दीं, कुछ में अपने कर्मचारियों को प्रोप्राइटर दिखाया। तीन फर्मों के फर्जी पंजीयन प्रमाण पत्र भी उसी के कार्यालय में बनाए गए।
20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंक के नियमों एवं परिपत्रों की अनदेखी कर 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी एवं टर्म लोन के रूप में ऋण सुविधाएँ स्वीकृत कीं। उन्होंने ऋण लेने वालों से असंबंधित व्यक्तियों की संपत्तियाँ बंधक के रूप में स्वीकार कीं और ऋण स्वीकृति से पहले की निरीक्षण रिपोर्ट में फर्मों के व्यवसाय एवं पते की गलत जानकारी दर्ज की। एक फर्म का पता तो भौमिक का घर ही निकला।
पैसा कहाँ गया?
लोन की रकम व्यवसाय में नहीं लगी। अलग-अलग खातों में घुमाकर अंतिम लाभार्थी भौमिक ही निकला। NSIC के माध्यम से रकम भौमिक की खुद की फर्म ए.बी. फास्टनर्स तक पहुंचाई गई और कूटरचित बिलों से NSIC रायपुर से भुगतान भी ले लिया। ऋण की अदायगी नहीं होने से बैंक ऑफ बड़ौदा को कुल ₹5,04,15,000 (पाँच करोड़ चार लाख पंद्रह हजार रुपये) की आर्थिक क्षति हुई।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. 5 करोड़ फर्जी लोन घोटाला क्या है?
बैंक ऑफ बड़ौदा राजकिशोर नगर शाखा बिलासपुर में 11 फर्जी फर्मों के नाम पर 5.04 करोड़ रुपये का लोन लिया गया था। EOW-ACB ने जांच के बाद 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय बिलासपुर में चालान पेश किया है।
Q2. इस घोटाले में आरोपी कौन-कौन हैं?
दो आरोपी हैं – (1) विश्वजीत भौमिक, उड़ान माइक्रो फाइनेंस का संचालक, उम्र 56 वर्ष, निवासी विवेकानंद नगर मोपका बिलासपुर (2) राहुल कुमार सिन्हा, तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक बैंक ऑफ बड़ौदा राजकिशोर नगर बिलासपुर, जो वर्तमान में गुजरात के कच्छ जिले की गढ़सीसा शाखा में पदस्थ हैं।
Q3. फर्जीवाड़ा कैसे किया गया?
भौमिक छोटा लोन दिलाने के नाम पर लोगों से आधार, पैन, KYC और प्रॉपर्टी के कागजात व कोरे चेक पर हस्ताक्षर ले लेता था। उन्हीं कागजों से उनके नाम पर फर्जी फर्में बना दीं, कुछ में अपने कर्मचारियों को मालिक दिखाया। 3 फर्जी पंजीयन प्रमाण पत्र भी खुद के कार्यालय में बनाए।
Q4. बैंक मैनेजर की क्या भूमिका रही?
20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच राहुल सिन्हा ने नियमों की अनदेखी कर 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन दिया। असंबंधित लोगों की संपत्ति बंधक ली, निरीक्षण रिपोर्ट में गलत पता लिखा, एक फर्म का पता तो भौमिक का घर ही निकला।
Q5. पैसा कहां गया और बैंक को कितना नुकसान हुआ?
लोन की रकम फर्मों के बिजनेस में नहीं लगी। अलग-अलग खातों में घुमाकर NSIC के जरिए भौमिक की खुद की फर्म ए.बी. फास्टनर्स तक पहुंचा दी गई। कूटरचित बिलों से NSIC रायपुर से भी भुगतान ले लिया। बैंक को कुल 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रुपये का नुकसान हुआ।
Q6. किन धाराओं में केस दर्ज हुआ है?
IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 120-B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 12 व 13(2) के तहत चालान पेश हुआ है। यह केस बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर 28 जनवरी 2020 को दर्ज हुआ था।



