Nag Panchami: भारत में नाग पूजा की परंपरा बेहद प्राचीन मानी जाती है। हिंदू धर्म में नागों को केवल सर्प के रूप में नहीं, बल्कि नाग देवता के रूप में पूजने की परंपरा रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों में नाग देवता और सर्प से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं वाले कई प्रसिद्ध मंदिर हैं।
नाग पंचमी के मौके पर इन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। इनकी अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं इन्हें खास बनाती हैं। आइए जानते हैं भारत के 5 प्रसिद्ध नाग मंदिरों के बारे में।
1. नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर देश के अनोखे नाग मंदिरों में गिना जाता है। यह प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका साल में केवल एक बार खुलना है। मान्यता के अनुसार, नाग पंचमी के दिन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे के लिए खोला जाता है। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की नाग पर विराजमान प्रतिमा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त उज्जैन पहुंचते हैं। यहां भगवान शिव और माता पार्वती को नागराज तक्षक के ऊपर विराजमान बताया जाता है। नाग पंचमी पर मंदिर में विशेष पूजा और अभिषेक किया जाता है। साल के बाकी दिनों में श्रद्धालु मंदिर के बाहर से ही दर्शन करते हैं।
2. मन्नारशाला नागराज मंदिर, केरल
केरल के अलाप्पुझा जिले में स्थित मन्नारशाला नागराज मंदिर नाग पूजा की अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। हरियाली और पेड़ों से घिरे मंदिर परिसर में नाग देवताओं से जुड़ी हजारों प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार यहां नागराज की विशेष पूजा की जाती है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपती भी यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की धार्मिक परंपरा में महिला पुजारी की भूमिका भी खास है। मुख्य पुजारिन को वलियम्मा के नाम से जाना जाता है। नाग देवता की पूजा और मंदिर की परंपराओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
3. नागराज मंदिर, नागरकोइल
तमिलनाडु के नागरकोइल शहर में स्थित नागराजा मंदिर नाग देवता को समर्पित एक प्राचीन मंदिर माना जाता है। खास बात यह है कि शहर का नाम भी इसी मंदिर के नाम से पड़ा है। मंदिर के गर्भगृह में नागराज की पूजा रेत से बने स्वरूप में की जाती है। यहां भक्तों को प्रसाद के तौर पर गीली रेत भी दी जाती है। इसे मंदिर की खास परंपरा माना जाता है। यह मंदिर नाग दोष, कालसर्प दोष, संतान प्राप्ति में बाधा और विवाह की अड़चनों को दूर करने के लिए जाना जाता है।
4. नागवासुकी मंदिर, प्रयागराज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी के तट पर स्थित नागवासुकी मंदिर नाग पूजा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में माना जाता है। यह दारागंज क्षेत्र में गंगा किनारे स्थित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन की कथा में नागराज वासुकी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के बाद नागराज वासुकी ने इसी क्षेत्र में विश्राम किया था। इसी वजह से यहां नागवासुकी की पूजा की विशेष परंपरा विकसित हुई। नाग पंचमी के दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और यहां मेले जैसा माहौल भी देखने को मिलता है। मान्यता है कि नागवासुकी के दर्शन और पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है।
5. थिरुनागेश्वरम नागनाथस्वामी मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु के कुंभकोणम के पास स्थित थिरुनागेश्वरम नागनाथस्वामी मंदिर नाग पूजा और नवग्रह उपासना के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान शिव को नागनाथस्वामी के रूप में पूजा जाता है। राहु ग्रह की भी विशेष पूजा होती है। मंदिर का सबसे चर्चित धार्मिक अनुष्ठान राहु अभिषेकम है। इस दौरान राहु की प्रतिमा पर दूध से अभिषेक किया जाता है। श्रद्धालुओं के बीच मान्यता है कि अभिषेक के दौरान प्रतिमा पर चढ़ाया गया दूध नीला दिखाई देता है और नीचे गिरने के बाद फिर सफेद हो जाता है। इसी विशेषता के कारण यह मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से आकर्षण का केंद्र है। राहु से जुड़ी पूजा और अनुष्ठान कराने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं।
नाग पंचमी पर क्यों खास होते हैं ये मंदिर?
नाग पंचमी के मौके पर देश के कई नाग मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर का साल में केवल एक बार खुलना, केरल के मन्नारशाला मंदिर की नाग पूजा परंपरा, नागरकोइल के नागराज मंदिर में रेत से बने नागराज स्वरूप की पूजा, प्रयागराज के नागवासुकी मंदिर की पौराणिक मान्यता और थिरुनागेश्वरम में राहु अभिषेकम जैसी परंपराएं इन मंदिरों को अलग पहचान देती हैं।
5 FAQs
1. भारत में नाग पूजा की परंपरा कैसी है?
भारत में नाग पूजा की परंपरा बेहद प्राचीन मानी जाती है। हिंदू धर्म में नागों को नाग देवता के रूप में पूजने की परंपरा रही है।
2. नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे खास बात क्या है?
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है।
3. मन्नारशाला नागराज मंदिर कहां स्थित है?
मन्नारशाला नागराज मंदिर केरल के अलाप्पुझा जिले में स्थित है।
4. नागवासुकी मंदिर की मान्यता क्या है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के बाद नागराज वासुकी ने प्रयागराज के इसी क्षेत्र में विश्राम किया था। मान्यता है कि नागवासुकी की पूजा से सर्प भय से मुक्ति मिलती है।
5. थिरुनागेश्वरम मंदिर में कौन सा प्रमुख अनुष्ठान होता है?
थिरुनागेश्वरम नागनाथस्वामी मंदिर में राहु अभिषेकम प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें राहु की प्रतिमा पर दूध से अभिषेक किया जाता है।


