टीआरपी। Celebrate Diwali on the night of Amavasya on 20th October : इस वर्ष कार्तिक अमावस्या दो दिन तक होने से दीपावली पर्व मनाने को लेकर संशय की स्थिति बन रही है। इस संशय को राजधानी के ज्योतिषियों ने खत्म कर दिया है। ज्योतिषियों के अनुसार पहले दिन 20 अक्टूबर को पड़ रही रात्रिकालीन अमावस्या तिथि पर ही दीपावली का पूजन करना शुभ होगा। क्योंकि दीपों का पर्व रात्रि में दीप प्रज्वलित करके मां लक्ष्मी की पूजा करके की जाती है। दूसरे दिन की अमावस्या तिथि पर स्नान दान करना चाहिए।

प्रदोष काल में ही मनाएं दीपावली

ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा स्थापित बोरियाकला स्थित शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख आचार्य ज्योतिषाचार्य दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद सरस्वती के अनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि पर प्रदोष काल में दीपावली का पर्व मनाया जाता है। कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर सोमवार को 31 घटी 33 पल अर्थात् दिन में दोपहर 2.56 बजे मिनट से आरंभ हो रही है और दूसरे दिन 21 अक्टूबर, मंगलवार को 25 घटी 16 पल अर्थात् 4 बजकर 26 मिनट पर समाप्त हो रही है। इसलिए रात्रिकाल में पड़ रही अमावस्या तिथि पर 20 अक्टूबर, सोमवार को दीपावली पर महालक्ष्मी का पूजन करना चाहिए।

संत महासभा छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी राजेश्वरानंद ने बताया कि प्रदेशभर के संतों, विद्वतजनों ने पिछले दिनों शंकर नगर स्थित सुरेश्वर महादेव पीठ में हुई बैठक में निर्णय लिया कि ज्योतिष शास्त्र के घटी, काल, तिथि अनुसार 20 अक्टूबर को ही दीपावली पर्व मनाना श्रेष्ठ होगा। बैठक में आचार्य बुद्धि विलास, काशी के विश्व धर्म संसद के सदस्य महंत वेदप्रकाश, महंत देवदास, आचार्य दिनेश शास्त्री, आचार्य रूपेश, आजीवन निराहारी संत गौतमानंद, साध्वी सौम्या, आचार्य शामिल हुए थे।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
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