Diwali 2026 Calendar: प्रकाश और खुशियों का पावन पर्व दीपावली इस बार श्रद्धालुओं के लिए और भी खास रहने वाला है। आमतौर पर 5 दिनों तक मनाया जाने वाला दीपोत्सव इस वर्ष तिथियों के क्रमिक बदलाव और विशेष संयोग के कारण पूरे 6 दिनों तक चलेगा।
6 नवंबर को धनतेरस से इस महापर्व का श्रीगणेश होगा, जो 11 नवंबर को भाई दूज के साथ संपन्न होगा। इन छह दिनों के दौरान हर दिन धार्मिक परंपराओं और उल्लास का अलग रंग देखने को मिलेगा।
तिथियों का गणित
8 नवंबर को प्रदोष काल और निशीथ काल के समय अमावस्या तिथि की उपस्थिति तथा स्थिर लग्न का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो मां महालक्ष्मी पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। 8 नवंबर को सुबह 11:29 बजे अमावस्या तिथि की शुरुआत होगी, जो 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। रात के समय अमावस्या की व्याप्ति होने से 8 नवंबर को ही दीपावली मनाना पूर्णतः शास्त्रसम्मत और उचित है।
क्यों बन रहा है 6 दिनों के पर्व का विशेष संयोग?
ज्योतिषविदों का कहना है कि तिथियों के समापन काल में अंतर के कारण इस बार पर्वों की श्रृंखला छह दिनों में विभाजित हुई है। धनतेरस, नरक चतुर्दशी और दीपावली जैसे मुख्य व्रतों के निर्धारण में सूर्यास्त व प्रदोष काल का महत्व होता है। वहीं गोवर्धन पूजा के लिए प्रतिपदा तिथि और भाई दूज के लिए अपराह्न व्यापिनी द्वितीया तिथि की गणना की जाती है। इसी कारण तिथियों के कालखंड अलग-अलग दिनों में पड़ने से पर्वों का विस्तार छह दिनों तक हो गया है।
6 नवंबर को धनतेरस से होगा दीपोत्सव का श्रीगणेश
दीपोत्सव के पहले दिन यानी 6 नवंबर को धनत्रयोदशी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन द्वादशी तिथि सुबह 10:31 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ होगा जो पूरी रात और प्रदोष काल में व्याप्त रहेगी। इसी दिन धनतेरस, भगवान धन्वंतरि जयन्ती और यम दीपदान की परंपरा निभाई जाएगी। घरों में समृद्धि और आरोग्य की कामना के साथ दीप प्रज्वलित किए जाएंगे।
7 नवंबर को छोटी दीपावली, रूप चतुर्दशी और यम दीपदान
7 नवंबर को त्रयोदशी तिथि सुबह 10:48 बजे समाप्त होकर चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी। शाम को प्रदोष काल में चतुर्दशी की उपस्थिति होने से इसी दिन छोटी दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। साथ ही, इसी दिन रूप चतुर्दशी और नरक चतुर्दशी का अरुणोदयकालीन स्नान भी होगा। माताओं-बहनों द्वारा शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाकर परिवार की रक्षा की प्रार्थना की जाएगी।
8 नवंबर को मनेगी बड़ी दीपावली, होगा मां लक्ष्मी का महापूजन
दीपोत्सव का सबसे मुख्य और भव्य दिन 8 नवंबर को रहेगा, जब देशभर में बड़ी दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 11:28 बजे तक चतुर्दशी रहेगी और उसके बाद अमावस्या शुरू हो जाएगी। शाम के समय प्रदोष काल और रात्रि में अमावस्या का दुर्लभ संयोग मिलने से इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि के साथ मां महालक्ष्मी और भगवान श्री गणेश का पूजन किया जाएगा। दीपों की पंक्तियों से पूरा देश जगमगा उठेगा।
9 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का उल्लास
अमावस्या तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगी और इसके बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। इसी दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पर्वत धारण करने की लीला को याद करते हुए प्रकृति, गोवंश और अन्न के प्रति आभार व्यक्त किया जाएगा। मंदिरों में छप्पन भोग और अन्नकूट का आयोजन होगा।
10 नवंबर को द्वितीया तिथि और भाई दूज की पृष्ठभूमि
कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 10 नवंबर को भी दोपहर बाद (अपराह्न काल) में रहेगी। इस वजह से भाई दूज की तारीख को लेकर कई लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही थी। हालांकि, शास्त्रसम्मत नियम के अनुसार जब द्वितीया तिथि लगातार दो दिनों तक अपराह्न काल को स्पर्श करती है, तो दूसरे दिन की अपराह्न व्यापिनी द्वितीया तिथि को ही पर्व मनाने के लिए प्राथमिकता दी जाती है।
11 नवंबर को भाई दूज के साथ होगा दीपोत्सव का समापन
भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक भाई दूज का पर्व 11 नवंबर को मनाया जाएगा। 11 नवंबर को द्वितीया तिथि दोपहर 01:27 बजे से 03:37 बजे तक अपराह्न काल में रहेगी। दो दिनों तक अपराह्न काल में द्वितीया की मौजूदगी होने के कारण दूसरे दिन यानी 11 नवंबर को ही भाई दूज मनाना शुभ और प्रामाणिक है। बहनें इस दिन भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना करेंगी।
बाजार गुलजार, दीपोत्सव को लेकर लोगों में भारी उत्साह
छह दिनों के इस लंबे दीपोत्सव को लेकर आम जनता के साथ-साथ व्यापारियों में भी भारी उत्साह है। धनतेरस से लेकर भाई दूज तक चलने वाले इस उत्सव से बाजारों में रौनक बढ़ गई है। लोग खरीदारी और घरों की सजावट की तैयारियों में जुट गए हैं। 6 दिनों की इस लंबी समयावधि से हर त्यौहार को धूमधाम और सुकून के साथ मनाने का अवसर मिलेगा।


