Raipur famous temples: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सिर्फ अपनी आधुनिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों के लिए भी जानी जाती है। शहर और आसपास कई ऐसे प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पुरानी बस्ती का करीब 900 साल पुराना महामाया मंदिर, खारून नदी तट का हटेश्वर महादेव मंदिर, जतमई मंदिर, दूधाधारी मंदिर, कंकाली तालाब, बंजारी माता मंदिर और वीआईपी रोड का श्री राम मंदिर इनमें प्रमुख हैं। इन धार्मिक स्थलों से जुड़ा इतिहास, स्थापत्य और अलग-अलग मान्यताएं इन्हें खास बनाती हैं। दर्शन के लिए यहां श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं।
महामाया मंदिर (पुरानी बस्ती)
महामाया देवी को समर्पित यह मंदिर रायपुर के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह रेलवे स्टेशन से 45 किलोमीटर दूर रायपुर के पुरानी बस्ती इलाके में स्थित है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 900 साल पुराना है। हजारों श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए प्रतिदिन आते हैं। यह मंदिर देवी लक्ष्मी और देवी सरस्वती को समर्पित है।

हटेश्वर महादेव मंदिर (खारून नदी तट)
भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर रायपुर से 5 किलोमीटर दूर खारुन नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 1402 ईसवी में राजा रम्हेन्द्रा के पुत्र ब्रह्मदेव राय के शासनकाल के दौरान हजीराज नाइक द्वारा किया गया था। मंदिर में 500 साल से लगातार अखंड धूनी प्रज्वलित हो रही है।

जतमई मंदिर
रायपुर से 85 किलोमीटर दूर जतमई मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। ग्रेनाइट से बने इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर आकर्षक भित्ति चित्र हैं। आंतरिक गर्भगृह में एक पत्थर की मूर्ति भी है। इस मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार भित्ति चित्रों से ढका हुआ है जो पौराणिक आकृतियों को दर्शाता है। गर्भगृह के अंदर जतमई की पत्थर की मूर्ति है।

दूधाधारी मंदिर
दूधाधारी मंदिर, रायपुर का सबसे पुराना मंदिर है। यह प्राचीन मंदिर कला प्रेमियों के लिए एक अद्भुत स्थल है। 17 वीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर में वैष्णव धर्म से संबंधित रामायण काल की मूल मूर्तियां हैं। यहाँ रामायण काल की दुर्लभ कलाकृतियां देखने को मिलती हैं। कालचुर राजा जैत सिंह (1603-1614 एडी) द्वारा निर्मित मंदिर की बाहरी दीवारों को भगवान राम से संबंधित मूर्तियों से सजाया गया है।

कंकाली तालाब
माना जाता है कि कंकाली तालाब का निर्माण नागा साधुओं द्वारा 650 साल पहले करवाया गया था। बाद में तालाब के बीच में छोटा सा मंदिर बनवाकर शिवलिंग की स्थापना की। अचानक एक दिन धरती से पानी की धारा फूट पड़ी और तालाब लबालब भर गया। सदियों से आज तक मंदिर तालाब के बीच डूबा है, जिसके चलते दर्शनार्थी शिवलिंग के दर्शन नहीं कर पाते। इस तालाब की खुदाई में कंकाल मिले थे, इसलिए इसका नाम कंकाली तालाब पड़ा। संतों के ‘समाधि’ भी यहाँ देख सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि इसमें डुबकी लगाने से त्वचा संबंधी रोग दूर हो जाते हैं।

बंजारा माता मंदिर
बंजारी माता को समर्पित इस मंदिर में दर्शन के लिए देशभर से भक्त यहाँ आते हैं। रायपुर के बंजारी माता मंदिर का इतिहास 500 साल पुराना है। माना जाता है कि 500 साल पहले रायपुर के भनपुरी क्षेत्र की बंजर जमीन से बंजारी माता प्रकट हुई थीं। जब बंजारी माता प्रकट हुईं तो उनका स्वरूप एक सुपारी जितना छोटा था। बंजारा समुदाय के लोगों ने बंजर जमीन पर माता का स्वरूप देख वहाँ एक छोटे मंदिर की स्थापना की। धीरे-धीरे माता के स्वरूप का विस्तार हुआ और माता का मंदिर भव्य बनाया गया।

श्री राम मंदिर
वीआईपी रोड पर स्थित यह मंदिर शहर के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है। यह भोजन की दुकानों में उपलब्ध स्वादिष्ट भोजन के लिए भी जाना जाता है। मंदिर की दीवारों पर विस्तृत और जटिल काम इस मंदिर की सुंदरता को और बढ़ाता है।

आस्था के साथ इतिहास और स्थापत्य की झलक
रायपुर के इन धार्मिक स्थलों की अपनी अलग पहचान है। किसी मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है, तो कहीं स्थापत्य और कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं कुछ स्थानों से स्थानीय धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं। यही वजह है कि रायपुर के ये मंदिर और धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखते हैं।


