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Hartalika Teej 2026: सुहागिनों के लिए खास है हरतालिका तीज, देखें पूजा की पूरी सामग्री और विधि

Hartalika Teej Puja Samagri with Lord Shiva and Goddess Parvati
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Hartalika Teej 2026: सोमवार, 14 सितंबर को हरतालिका तीज का पावन पर्व मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, जिसके बाद से यह व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है। पूजा के दौरान किसी सामग्री की कमी न हो, इसलिए पूजन से पहले पूरी सामग्री तैयार कर लेना शुभ माना जाता है

हरतालिका तीज पूजा सामग्री लिस्ट

शास्त्रीय विधान के अनुसार, पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री जुटाना बेहद शुभ माना जाता है, ताकि अनुष्ठान के दौरान किसी चीज की कमी न रहे। पूजन के लिए निम्नलिखित सामग्रियों की जरूरत होती है:

  • भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर
  • बालू या काली मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा
  • पूजा की चौकी और साफ कपड़ा
  • कलश, जल और नारियल
  • आम के पत्ते
  • रोली, कुमकुम और हल्दी
  • अक्षत (चावल)
  • चंदन और सिंदूर
  • मौली या कलावा
  • दूर्वा और बेलपत्र
  • शमी पत्र
  • विभिन्न प्रकार के ताजे फूल और फूलों की माला
  • धूप, अगरबत्ती और दीपक
  • कपूर
  • पान, सुपारी, लौंग और इलायची
  • फल और मिठाई
  • पंचामृत बनाने की सामग्री
  • माता पार्वती के लिए सुहाग सामग्री—चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, चुनरी और 16 श्रृंगार का पूरा सामान
  • दक्षिणा
  • पूजा की थाली और आरती की सामग्री

व्रत का धार्मिक महत्व और मान्यता

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए जंगल में कठोर तपस्या की थी। उनके इसी दृढ़ संकल्प और त्याग की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है।

इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। वहीं, कई जगहों पर कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत को करती हैं। इस दिन पूरे दिन-रात श्रद्धा के साथ शिव-पार्वती की पूजा, व्रत कथा सुनने और आरती करने की परंपरा है। माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता हमेशा बनी रहती है।

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