Hartalika Teej Chhattisgarh Karu Bhat
हरतालिका तीज के अवसर पर छत्तीसगढ़ में करू-भात (करेले की सब्जी और चावल) का सेवन करने की परंपरा निभाएंगी महिलाएं

Hartalika Teej: छत्तीसगढ़ी बोली में कड़वा को ‘करू’ और पके हुए चावल को ‘भात’ कहा जाता है। हरतालिका तीज के पर्व से एक दिन पहले छत्तीसगढ़ के हर घर में करेले की सब्जी और चावल खाने की विशेष परंपरा है।

महिलाएं इस दिन ‘करू-भात’ ग्रहण करने के बाद अगले दिन निर्जला उपवास रखती हैं और इस दौरान कुछ भी नहीं खाती हैं।

बाजारों में क्यों बढ़ जाती है करेले की मांग?

तीज के एक दिन पहले करेले का विशेष महत्व होने के कारण बाजारों में इसकी मांग अचानक बहुत अधिक बढ़ जाती है। कई स्थानों पर करेला 100 रुपए प्रति किलो तक बिकता है। इसके बावजूद महिलाएं इसे खरीदती हैं, क्योंकि करू-भात के इस प्राचीन रिवाज के बिना तीजा का व्रत अधूरा माना जाता है।

करू-भात खाने के पीछे क्या है वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यता?

मान्यताओं के अनुसार, तीज व्रत के एक दिन पहले करेला खाने से उपवास के दौरान कम प्यास लगती है। इसके अलावा, धार्मिक दृष्टिकोण से मन की शुद्धता के लिए करेले की कड़वाहट जरूरी मानी जाती है, जिससे मन शांत होता है और व्रत रखने की आंतरिक शक्ति मिलती है।

पौराणिक कथा: क्यों रखा जाता है हरतालिका तीज व्रत?

हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए जंगल में कठोर तपस्या की थी। उनकी सखियों ने उनका हरण करके उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था, ताकि उनका विवाह भगवान विष्णु से न हो सके। सखियों द्वारा हरण किए जाने के कारण ही इस व्रत का नाम ‘हरतालिका तीज’ पड़ा।

इस साल खास संयोग: हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी

इस वर्ष 2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का अद्भुत संयोग एक ही दिन बन रहा है। महिलाएं एक तरफ जहां पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला तीज का व्रत रखेंगी, वहीं दूसरी तरफ घर-घर में गणेश प्रतिमाएं स्थापित करके गणेशोत्सव का शुभारंभ भी किया जाएगा।

  • छत्तीसगढ़ी बोली में ‘करू’ का अर्थ कड़वा (करेला) और ‘भात’ का अर्थ पके हुए चावल से होता है।
  • मान्यता है कि करेला खाने से व्रत के दौरान प्यास कम लगती है और मन की शुद्धता व शांति बनी रहती है।
  • माता पार्वती की सखियों ने उनका हरण (अपहरण) करके उन्हें जंगल में छिपा दिया था ताकि उनका विवाह विष्णुजी से न हो, इसलिए इस व्रत का नाम हरतालिका तीज पड़ा।
  • इस वर्ष 2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग एक ही दिन बन रहा है।
  • तीजा के अगले दिन चतुर्थी को पूजन सामग्री और भगवान शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा का नदी या तालाब में विसर्जन किया जाता है।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
पत्रकारिता जगत में राजनीतिक खबरों से लेकर खेल, धर्म-समाज, पर्यटन, संस्कृति, पुरातत्व, समाज एवं कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल संरक्षण आयोग, महिला आयोग, सहित विविध विभागों की रिपोर्टिंग का अनुभव रहा है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र में बदलाव और आम जनता की समस्याओं को सटीक रूप से उजागर करना है।