Navratri kalash: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व समाप्त होने के बाद पूजा घर में स्थापित किए गए कलश, उसमें रखी सामग्री और नारियल को सही विधि व नियमों के अनुसार उपयोग या विसर्जित करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन सभी सामग्रियों में पूरे नौ दिनों की पूजा की दिव्य ऊर्जा और शक्ति समाहित होती है। यदि इनका सही तरीके से ध्यान रखा जाए, तो घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
कलश और नारियल में होती है संपूर्ण भक्ति की शक्ति
महानवमी के समापन के बाद हर किसी के मन में यह सवाल रहता है कि पूजा में रखे गए कलश और नारियल का क्या किया जाए। वास्तु गुरु और ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इन पवित्र वस्तुओं का रखरखाव या विसर्जन पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ होना चाहिए। चूंकि इनमें मां दुर्गा की कृपा और नौ दिनों की साधना की ऊर्जा होती है, इसलिए इन्हें कभी भी लापरवाही से इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए।
पवित्र नारियल से जुड़े नियम और प्रसाद के रूप में वितरण
कलश के मुख पर स्थापित नारियल को माता रानी का साक्षात आशीर्वाद माना जाता है। यदि आपका परिवार इस नारियल को तोड़कर प्रसाद के रूप में बांटना चाहता है, तो इसे किसी शुभ मुहूर्त में फोड़ें और सभी सदस्यों में वितरित करें। मान्यता है कि यह प्रसाद खाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि आप इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं कर सकते हैं, तो इसे आदर के साथ किसी साफ नदी में विसर्जित कर देना चाहिए।
नारियल की जटा की धुनी से दूर करें घर की नकारात्मक ऊर्जा
नारियल का प्रसाद ग्रहण करने के बाद कभी भी उसकी जटा (छिलका) को कचरे में नहीं फेंकना चाहिए। इसकी बजाय, शाम के समय इस जटा को कपूर, लौंग और पीली सरसों के साथ मिलाकर जलाएं। इसके बाद इसका धुआं पूरे घर में घुमाकर धुनी करें। ऐसा करने से घर का वास्तु दोष, बुरी नजर और हर प्रकार की नकारात्मकता कम होने लगती है।
तिजोरी में नारियल स्थापित करने का लाभ और तरीका
आप चाहें तो कलश पर रखे इस पवित्र नारियल को उठाकर एक नए लाल रेशमी वस्त्र में लपेट सकते हैं। इसके बाद इस पर लाल मौली (कलावा) लपेटकर अपने घर या व्यापारिक प्रतिष्ठान की तिजोरी में रख लें। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से सालभर धन, बरकत और आर्थिक समृद्धि आकर्षित होती है।
कलश के पवित्र जल का घर में छिड़काव और सही उपयोग
नवरात्रि कलश में रखे जल को बहुत ही पवित्र और ऊर्जावान माना जाता है। इस जल को आम या अशोक के पत्ते की मदद से अपने घर के हर कमरे, रसोई और विशेष रूप से मुख्य द्वार पर छिड़कना चाहिए। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसके बाद बचे हुए जल को किसी साफ पौधे की जड़ में अर्पित कर दें। ध्यान रहे कि यह जल किसी के पैरों को स्पर्श नहीं करना चाहिए और इसे कभी भी नाली में नहीं बहाना चाहिए।
कलश पर लगे कुमकुम और चंदन का पारिवारिक उपयोग
कलश पर बनाए गए स्वास्तिक और उस पर अर्पित रोली या चंदन में सकारात्मक ऊर्जा होती है। कलश साफ करने से पहले उस रोली या चंदन को उंगली से लेकर अपने परिवार के सभी सदस्यों के माथे पर लगाएं। इसे प्रसाद के रूप में माथे पर लगाने से अत्यंत शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मकता में वृद्धि होती है।
कलश, सिक्का, सुपारी और अन्य सामग्री का विसर्जन व रखरखाव
नवरात्रि के पहले दिन कलश में जो सिक्का और सुपारी डाली गई थी, उसे निकालकर अच्छी तरह साफ कर लें। सिक्के को अपनी तिजोरी या पर्स में बरकत के लिए रखें, जबकि सुपारी को मंदिर में ही स्थापित रहने दें। यदि कलश मिट्टी का है, तो उसे बाद में विसर्जित कर दें या उसमें कोई पौधा लगा दें। तांबे या पीतल के कलश को साफ करके दोबारा सामान्य पूजा-पाठ में उपयोग किया जा सकता है।



