Shani Nakshatra Parivartan 2026: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनिदेव ने 20 अगस्त 2026 को अपना नक्षत्र बदल लिया है। शनि ने रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश किया है। शनि के इस नक्षत्र परिवर्तन का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग माना जाता है। हालांकि, मेष, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए यह बदलाव खास बताया जा रहा है।
इन तीनों राशियों के जातक फिलहाल शनि की साढ़ेसाती के अलग-अलग चरणों से गुजर रहे हैं और नक्षत्र परिवर्तन के बाद कुछ मामलों में राहत मिलने की संभावना जताई गई है।
क्या होती है शनि की साढ़ेसाती
ज्योतिष के अनुसार जब शनि किसी व्यक्ति की जन्म राशि यानी चंद्र राशि से एक राशि पहले, उसी राशि में और उसके बाद वाली राशि में गोचर करते हैं, तो इसे साढ़ेसाती कहा जाता है। इन तीनों राशियों में शनि करीब ढाई-ढाई साल रहते हैं। इस तरह इसकी कुल अवधि करीब साढ़े सात साल होती है। फिलहाल मेष, कुंभ और मीन राशि के जातक शनि की साढ़ेसाती के अलग-अलग चरणों से गुजर रहे हैं। 20 अगस्त के नक्षत्र परिवर्तन के बाद इन तीनों राशियों के लोगों को कुछ मामलों में राहत मिलने की संभावना बताई गई है।
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। नक्षत्र परिवर्तन के बाद जीवन में कुछ स्थिरता आने की उम्मीद है। अचानक आने वाली रुकावटें कम हो सकती हैं और लंबे समय से परेशान कर रही समस्याओं से राहत मिलने के योग बन सकते हैं। कामकाज में सोच-समझकर लिए गए फैसले फायदा दे सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए योजनाओं को आगे बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं।
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए शनि का यह बदलाव खास माना जा रहा है। इन पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। नक्षत्र परिवर्तन के बाद लंबे समय से चले आ रहे मानसिक तनाव और संघर्ष में कमी आने की उम्मीद है। कार्यक्षेत्र में अटके हुए काम गति पकड़ सकते हैं। रुका हुआ धन वापस मिलने से आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
मीन राशि
मीन राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा यानी मध्य चरण चल रहा है। नक्षत्र परिवर्तन के बाद मानसिक दबाव, भ्रम और किसी अनजाने डर से राहत मिलने की संभावना जताई गई है। मेहनत का बेहतर परिणाम मिल सकता है। कामकाज में वरिष्ठ अधिकारियों और परिवार के लोगों का सहयोग मिलने के योग बन सकते हैं।
शनि को प्रसन्न करने के लिए क्या करें
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इसके साथ ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप किया जा सकता है। जरूरतमंद लोगों को काले तिल, उड़द की दाल या काले कपड़े का दान करना भी शनि से जुड़े उपायों में बताया गया है।
5 Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. शनिदेव ने 20 अगस्त 2026 को किस नक्षत्र में प्रवेश किया है?
उत्तर: शनिदेव ने 20 अगस्त 2026 को रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश किया है।
Q2. शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन किन राशियों के लिए सबसे भाग्यशाली माना जा रहा है?
उत्तर: यह परिवर्तन मेष, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए सबसे भाग्यशाली और राहत देने वाला माना जा रहा है।
Q3. शनि की साढ़ेसाती क्या होती है और यह कितने समय तक रहती है?
उत्तर: जब शनि चंद्र राशि से एक राशि पहले, उसी राशि में और अगली राशि में गोचर करते हैं, तो लगभग ढाई-ढाई साल के तीन चरणों को मिलाकर साढ़े सात साल की साढ़ेसाती बनती है।
Q4. कुंभ और मीन राशि पर साढ़ेसाती का कौन सा चरण चल रहा है?
उत्तर: कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का अंतिम (तीसरा) चरण और मीन राशि पर दूसरा (मध्य) चरण चल रहा है।
Q5. शनिदेव के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए क्या उपाय बताए गए हैं?
उत्तर: शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं, ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें और जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल या काले कपड़े दान करें।


