बस्तर के बाजारों में बिकने वाला स्वादिष्ट बास्ता (बांस करील) और इसकी पारंपरिक सब्जी।
Bamboo and Fresh Bamboo Karil

Bamboo Sabji Recipe: छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अपनी अनूठी आदिवासी परंपराओं, समृद्ध संस्कृति और नैसर्गिक जीवनशैली के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। मानसून का आगमन होते ही बस्तर के स्थानीय साप्ताहिक बाजारों में एक खास तरह की प्राकृतिक सब्जी की आवक शुरू हो जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘बास्ता’ यानी बांस की करील कहा जाता है। बारिश के शुरुआती महीनों में बांस की जड़ों से निकलने वाली यह कोमल कली खाने में बेहद स्वादिष्ट और सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है। हालांकि, इस स्वादिष्ट व्यंजन की भारी मांग के कारण बस्तर के जंगलों में बांस के नए पौधों के विकास पर संकट भी मंडराने लगा है।

जानिए इसे पकाने का पारंपरिक तरीका
बस्तर में बास्ता की सब्जी बनाने का तरीका बेहद खास और पारंपरिक होता है। सबसे पहले जंगल से लाए गए ताजा बास्ता के ऊपरी कठोर छिलकों को छीलकर निकाल दिया जाता है। इसके अंदर के सफेद और बेहद कोमल हिस्से को बारीक टुकड़ों में काट लिया जाता है। करील में मौजूद प्राकृतिक कसैलेपन को दूर करने के लिए कटे हुए टुकड़ों को रात भर पानी में भिगोकर रखा जाता है या फिर हल्दी-नमक के पानी में उबाला जाता है। इसके बाद सरसों तेल में राई, मिर्च, प्याज, लहसुन और आंचलिक मसालों के साथ धीमी आंच पर इसे भुना जाता है। बस्तर के ग्रामीण इलाकों में इसे चने की दाल या उड़द दाल के साथ मिलाकर भी पकाया जाता है, जिसका स्वाद लाजवाब होता है।

जंगलों की सुरक्षा बनाम जायका
बांस की करील का जायका जितना लजीज होता है, इसका पर्यावरण पर असर उतना ही चिंताजनक है। दरअसल, बारिश के मौसम में बांस की जड़ों से जो नए कल्ले निकलते हैं, वही आगे चलकर बांस के नए पेड़ बनते हैं। जब ग्रामीण इन कोमल करील को तोड़ लेते हैं, तो बांस की नई पौध पनपने से पहले ही नष्ट हो जाती है। पिछले कुछ वर्षों में बस्तर के जंगलों में बांस के रकबे में आई कमी को देखते हुए प्रशासन अब इसे बचाने के लिए सख्त रुख अपना रहा है।

कार्रवाई शुरू
बांस के वनों को बचाने के लिए वन विभाग की टीमें अब शहर के मुख्य बाजारों और हाट-बाजारों पर नजर रख रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्तर रेंज के वन अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई शुरू की है। हाल ही में वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने जगदलपुर शहर के संजय मार्केट में छापेमारी कर डेढ़ क्विंटल करील जब्त की।

पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर
एक ओर जहां बास्ता की बिक्री से स्थानीय आदिवासियों को मानसून के दौरान आजीविका का जरिया मिलता है, वहीं दूसरी ओर जंगलों से अंधाधुंध बास्ता तोड़े जाने से बांस आधारित उद्योगों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंच रहा है। अगर बांस के नए पौधे तैयार नहीं होंगे, तो आने वाले समय में न केवल जंगलों का घनत्व कम होगा, बल्कि पारंपरिक बांस शिल्प से जुड़े परिवारों के सामने भी कच्चे माल का संकट गहरा जाएगा। प्रशासन अब ग्रामीणों को करील तोड़ने के बजाय बांस को सड़ने और बढ़ने देने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

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Q: बास्ता या बांस की करील क्या होती है?
उत्तर: मानसून के दौरान बांस की जड़ों से निकलने वाली नई और कोमल कली को बास्ता या बांस की करील कहा जाता है। इसका उपयोग सब्जी बनाने में किया जाता है।

Q: बस्तर बास्ता सब्जी बनाने से पहले कड़वाहट कैसे दूर करें?
उत्तर: बास्ता को बारीक काटने के बाद रात भर साफ पानी में भिगोकर रखें या फिर 10-15 मिनट के लिए हल्दी-नमक के पानी में उबाल लें। इससे इसका कसैलापन निकल जाता है।

Q: बांस करील (Bamboo Shoot) सेहत के लिए क्यों फायदेमंद माना जाता है?
उत्तर: इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स होते हैं। यह पाचन तंत्र को सही रखने और वजन नियंत्रित करने में मददगार माना जाता है।

Q: वन विभाग बास्ता की बिक्री पर रोक क्यों लगा रहा है?
उत्तर: करील तोड़ देने से बांस की नई पौध नहीं पनप पाती, जिससे बस्तर के जंगलों में बांस के पेड़ों की संख्या तेजी से घट रही है। जंगलों को बचाने के लिए यह रोक लगाई जा रही है।

Q: बस्तर में बास्ता की सब्जी किस मौसम में मिलती है?
उत्तर: यह सब्जी मुख्य रूप से मानसून (बारिश के मौसम) में जुलाई से सितंबर के महीनों के दौरान बस्तर के स्थानीय बाजारों में मिलती है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।