Celebration of a baby elephant’s birth: छत्तीसगढ़ में अक्सर हाथी-मानव द्वंद्व की खबरें आती हैं, लेकिन कोरबा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो दिल को छू लेगी। यहाँ इंसान और प्रकृति के बीच दुश्मनी नहीं, बल्कि एक परिवार जैसा रिश्ता देखने को मिला है। करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम साजापानी में 4 दिन पहले जन्मे नन्हे बेबी एलीफेंट के आगमन से पूरे गांव में दीपावली जैसा माहौल है।
आमतौर पर हाथी प्रभावित गांवों में दहशत होती है, लेकिन साजापानी के ग्रामीणों ने इस नन्हे मेहमान को अपने घर के नवजात की तरह अपना लिया है। गांव के बुजुर्गों ने आपसी बैठक कर फैसला किया कि इस बच्चे की ‘छठी’ बिल्कुल वैसी ही मनाई जाएगी, जैसे उनके अपने घर के बच्चे की मनाई जाती है। यह फैसला बताता है कि कोरबा के इस इलाके में ग्रामीण हाथियों को नुकसान पहुंचाने वाला जीव नहीं, बल्कि जंगल का अपना बच्चा मानते हैं।

25 अक्टूबर को धूमधाम से मनेगी छठी
ग्रामीणों ने इसके लिए बाकायदा डिजिटल निमंत्रण कार्ड छपवाया है, जिसे व्हाट्सएप और हाथों-हाथ बांटा जा रहा है। 25 अक्टूबर रविवार को पूरे विधि-विधान, ढोल-मांदर और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नन्हे हाथी की छठी का आयोजन होगा। गांव की महिलाओं ने उसके लिए छोटे-छोटे फूलों की मालाएं और साज-सज्जा की तैयारी शुरू कर दी है।

झारा-झारा नेवता और अफसरों को भी बुलावा
इस अनूठे उत्सव को यादगार बनाने के लिए ग्रामीणों ने आसपास के आधा दर्जन से ज्यादा हाथी-प्रभावित गांवों में पारंपरिक ‘झारा-झारा’ जाकर नेवता दिया है। साथ ही जिला प्रशासन के आला अफसरों, वन विभाग और जनप्रतिनिधियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, ताकि यह संदेश जाए कि सह-अस्तित्व ही सबसे बड़ा समाधान है।
कब और कहां होगा कार्यक्रम?
कार्ड के अनुसार छठी कार्यक्रम दिनांक 25.10.2026 को मां काशीरानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में रखा गया है, जिसमें सभी सादर आमंत्रित किया गया है।

मुख्य अतिथि और विशेष संदेश
इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और समाजसेवी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्ड पर एक सुंदर संदेश भी लिखा है – “हाथी हमारे वन की शान है, इनकी रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है” और “हाथी बचाओ, जंगल बचाओ, धरती बचाओ”। ग्रामीणों की अपील है – “वन्य जीवों की रक्षा करें, प्रकृति का साथ दें”।
11 हाथियों का दल इलाके में है मौजूद
सजापानी गांव के निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बोधन चौहान ने टीआरपी न्यूज से बातचीत में बताया कि इलाके में 11 हाथियों का दल पास के जंगल में काफी समय से शांतिपूर्वक तरीके से रुका हुआ है। इतने दिनों में केवल कल ही हाथियों के दल ने गाँव के खेतों तक पहुंचकर मामूली नुक़सान पहुंचाया है। हालांकि नुकसान की भरपाई वन विभाग कर देगा।
बता दें कि सजापानी के जंगल में जन्मे हाथी शावक का ड्रोन वीडियो काफी वायरल हुआ था, जिसमें नवजात बेबी एलिफेंट को सुरक्षा देते हुए दूसरे हाथियों ने घेर रखा था।
हाथियों तक पहुंचाएंगे फल और प्रसाद
बोधन ने बताया कि गांव में कल खुशी का माहौल रहेगा, इस मौके पर परंपरागत तरीके से पूजापाठ भी होगा। इस दौरान जो प्रसाद भोग तैयार होगा उसे केले और अन्य फलों के साथ हाथियों तक भी पहुंचाया जाएगा।
वन विभाग के अधिकारी भी ग्रामीणों की इस पहल से अभिभूत हैं। यह घटना साबित करती है कि अगर वन्यजीवों को सम्मान दिया जाए, तो ग्रामीण ही उनके सबसे बड़े रक्षक बन जाते हैं।
FAQ – कोरबा बेबी एलीफेंट नन्हीं परी की छट्टी
Q1. कोरबा में बेबी एलीफेंट कहां जन्मा है?
कोरबा वन मंडल के करतला वन परिक्षेत्र के साजापानी जंगल करमीछुआ में एक मादा हाथी ने मादा शावक को जन्म दिया है, जिसे ग्रामीणों ने नन्हीं परी नाम दिया है।
Q2. छट्टी कार्यक्रम कब और कहां होगा?
इस नन्हीं परी का छट्टी कार्यक्रम दिनांक 25 अक्टूबर 2026 को मां काशीरानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा, साजापानी में रखा गया है।
Q3. कार्यक्रम का आयोजन किसने किया है?
इसका आयोजन ग्राम पंचायत साजापानी, वन परिक्षेत्र करतला और वन मंडल कोरबा के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
Q4. किस-किस को आमंत्रित किया गया है?
रामभाठा, लबेद, पहाड़ गांव, कांशीपानी, छातापाठ, जामपानी, घुईचुवा समेत समस्त क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और जिला प्रशासन के अफसरों को सादर आमंत्रित किया गया है।
Q5. ग्रामीणों का इस आयोजन के पीछे उद्देश्य क्या है?
ग्रामीणों का कहना है – “हाथी हमारे वन की शान है, इनकी रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है”। इस आयोजन से मानव-हाथी सह-अस्तित्व का संदेश देना है – हाथी बचाओ, जंगल बचाओ, धरती बचाओ।



