Major fraud at PGBT College: तारबाहर स्थित उन्नत शिक्षा अध्ययन संस्थान PGBT कॉलेज में फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सेवानिवृत्त प्राचार्य के फर्जी हस्ताक्षर और संस्था की सील का इस्तेमाल कर 5 प्राध्यापकों के तबादले का कूटरचित प्रस्ताव तैयार कर दिया गया।
आरोप है कि इसी फर्जी प्रस्ताव को स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय और संचालक के समक्ष पेश कर तबादला आदेश जारी करा लिया गया। इस प्रस्ताव के आधार पर सहायक प्राध्यापक नूर मोहम्मद रिज्वी, व्याख्याता करीम खान, डॉ. सलीम जावेद और विद्याभूषण शर्मा समेत 5 शिक्षकों का तबादला दूसरी जगह कर दिया गया।
सेवानिवृत्त प्राचार्य की शिकायत पर हुई जांच
मामले का खुलासा होने पर सेवानिवृत्त प्राचार्य ने SSP से शिकायत की। शिकायत के बाद मामला तारबाहर पुलिस को सौंपा गया।
हस्ताक्षरों का नहीं हो सका मिलान
पुलिस ने कॉलेज से मूल दस्तावेज और सील जब्त कर मिलान किया तो हस्ताक्षर मेल नहीं खाए। जांच में पूर्व प्राचार्य मीता मुखर्जी, गवाह सोहित कुमार पटेल, अमर कुमार मलिक, माया दत्ता और कार्यालय स्टाफ सुखनंदन लाल साहू के बयान दर्ज किए गए हैं।

ASP सिटी पंकज पटेल ने बताया कि जांच के बाद BNS की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया गया है। अब पुलिस पता लगा रही है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और सील-हस्ताक्षर का इस्तेमाल किसने किया।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. PGBT कॉलेज में क्या फर्जीवाड़ा हुआ है?
सेवानिवृत्त प्राचार्य के फर्जी हस्ताक्षर और सील से 5 प्राध्यापकों के तबादले का कूटरचित प्रस्ताव बनाकर मंत्रालय में पेश किया गया।
Q2. किन 5 प्रोफेसरों का तबादला हुआ?
नूर मोहम्मद रिज्वी, करीम खान, डॉ. सलीम जावेद, विद्याभूषण शर्मा समेत 5 शिक्षक।
Q3. मामले की शिकायत किसने की?
सेवानिवृत्त प्राचार्य ने SSP बिलासपुर से शिकायत की थी।
Q4. जांच कौन कर रहा है?
तारबाहर पुलिस मामले की विवेचना कर रही है, ASP सिटी पंकज पटले ने FIR की पुष्टि की है।
Q5. पुलिस जांच में क्या सामने आया?
जब्त दस्तावेजों पर हस्ताक्षर तत्कालीन प्राचार्य के मूल हस्ताक्षर से मेल नहीं खाए, जिसके बाद BNS के तहत केस दर्ज हुआ।



