Action Against Kotwars: सरकार की नायाब जमीन बेचने वाले कोटवारों पर दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने सख्त प्रहार किया है। जिले के 51 गांवों में कोटवारों द्वारा सेवा शर्त पर मिली कोटवारी भूमि को बेचने का मामला सामने आने पर 115.71 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री शून्य घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जिले में कोटवारी भूमि विक्रय रजिस्ट्री शून्य कराने 73 सिविल वाद दायर हुए हैं। दुर्ग जिले के 51 ग्रामों के कोटवारों द्वारा उसे ग्राम सेवक के रूप में सेवा करने की शर्त पर मिली भूमि को विक्रय कर देने का मामला आने के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर विक्रय शून्य घोषित कराने सिविल वाद दायर कराने की कार्रवाई हुई है। वहीं 29 कोटवार जो अभी पद पर हैं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए राजस्व न्यायालयों में प्रकरण दर्ज कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
नियम क्या कहता है?
छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 183 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि ऐसा संव्यवहार, जिसके द्वारा कोई ग्राम सेवक अपनी सेवा भूमि में के अपने हित को विक्रय, दान, बंधक, उप पत्ते द्वारा या अन्यथा एक वर्ष से अनाधिक कालावधि तक के उप पत्ते द्वारा के सिवाय अंतरित करने का प्रयत्न करता है, शून्य होगा।
कहां कितनी जमीन बेची गई?
दुर्ग जिले में कुल 6 तहसीलों के 51 ग्रामों के 107 खसरा नंबर के 115.71 एकड़ (46.827 हेक्टेयर) कोटवारी भूमि का विक्रय पाया गया, जो इस प्रकार हैं:
- दुर्ग तहसील: 16 गांव – 13.997 हेक्टेयर
- धमधा तहसील: 5 गांव – 5.760 हेक्टेयर
- पाटन तहसील: 17 गांव – 10.73 हेक्टेयर
- भिलाई-3 तहसील: 3 गांव – 5.610 हेक्टेयर
- बोरी तहसील: 1 गांव – 0.280 हेक्टेयर
- अहिवारा तहसील: 9 गांव – 10.450 हेक्टेयर
115 एकड़ से अधिक कोटवारी भूमि विक्रय करना पाए गए कलेक्टर के निर्देश के बाद जिले के 6 तहसीलों के कुल 51 ग्रामों के 107 खसरे के कुल 115.71 एकड़ (46.827 हैक्टेयर) कोटवारी भूमि विक्रय पाये जाने से विक्रय निरस्त कराने 73 सिविल वाद प्रकरण दायर कर दिए गए है। साथ ही कोटवारी भूमि विक्रय करने वाले ऐसे 29 कोटवार जो अभी कोटवार पद पर बने हुए है उनके विरुद्ध अनुशासनात्म्क कार्यवाही करने संबंधित राजस्व न्यायालयों में प्रकरण दर्ज कर लिये गए है, जहां उन कोटवारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सुनवाई प्रारम्भ कर दी गई है।
सुनवाई उपरांत उन कोटवारों के विरुद्ध नियमानुसार भू राजस्व संहिता के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
खसरा सॉफ्टवेयर में ब्लॉक, अब बिक्री नहीं होगी
भविष्य में कोटवारी भूमि की बिक्री रोकने के लिए जिले की सभी सेवा भूमियों के खसरा नंबरों को पंजीयन विभाग के सॉफ्टवेयर में ब्लॉक कर दिया गया है, ताकि कोई भी रजिस्ट्री न हो सके।
प्रदेश भर में हुई है कोटवारी भूमि की बिक्री
बता दें कि यह केवल दुर्ग जिले का मामला नहीं है। प्रदेश के कई जिलों में कोटवारों ने सेवा भूमि के रूप में मिली जमीनों को अपना बताकर बेच दिया है। राजस्व अमले ने भी सेवा भूमि को कोटवार के हक की भूमि बताकर उसे बेचने में सहयोग किया। हाल ही में हाई कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में कोटवारी भूमि बेचे जाने को अवैधानिक ठहराया था। इस फैसले को दुर्ग कलेक्टर ने संज्ञान में लेते हुए पूर्व में बेचीं गई कोटवारी भूमि के प्रकरण तैयार करवाए, अब कार्रवाई शुरू हो गई है।


