कांकेर। मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत 10 फरवरी को गोविंदपुर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। आरोप है कि यहां एक जोड़े के पहले से शादीशुदा होने के बावजूद योजना का लाभ लेने के लिए दोबारा शादी करा दी गई। सोशल मीडिया पर तस्वीरों के वायरल होने के बाद मामला उजागर हुआ, जिससे सत्यापन तंत्र की गंभीर लापरवाही भी सामने आई है।

मामले के उजागर होने के बाद आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। आवेदन सेक्टर हरनगढ़ से किया गया, जबकि नियमानुसार वधू पक्ष की स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र से आवेदन अनिवार्य है। आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सेक्टर सुपरवाइजर ने बिना गहन जांच के आवेदन स्वीकार कर लिया। पंचायत से अविवाहित होने का प्रमाण पत्र तो लिया गया, लेकिन वास्तविक वैवाहिक स्थिति की पुष्टि नहीं की गई।

जांच के बाद की गई कार्रवाई

मामले के संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर निलेश क्षीरसागर के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच शुरू की। जांच में दोबारा विवाह की पुष्टि हुई। इसके बाद हरनगढ़ सेक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जानवी शाह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

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वहीं, पूरे मामले में निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाली सुपरवाइजर पुष्पलता नायक के खिलाफ भी विभाग ने कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोक दिया है।

पिछले साल हो चुका था विवाह

जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को पखांजूर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में ग्राम पीवी-34 निवासी सुदीप विश्वास और पीवी-64 निवासी स्वर्ण मिस्त्री ने विवाह किया, जबकि इन दोनों की शादी इससे पहले ही 3 जून 2025 को हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि यह जोड़ा संगम सेक्टर का निवासी है, लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए इनका पंजीयन 20 किलोमीटर दूर हरनगढ़ सेक्टर में कराया गया।

वायरल तस्वीरों में वर-वधू सिंदूर और बंगाली परंपरा के अनुसार पोला पहने हुए दिखाई दे रहे हैं, जो पहले से विवाहित होने का संकेत देते हैं। गौरतलब है कि योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। ऐसे में फर्जी पंजीकरण के कारण सरकारी राशि गलत हाथों में चली गई।

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