जस्टिस यशवंत वर्मा दोषी करार
Cash Scandal: Justice Yashwant Varma Found Guilty

Justice Yashwant Varma Found Guilty: दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से जले हुए नोट मिलने के “कैश कांड” मामले में बड़ी अपडेट आई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 3 सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी करार दिया है और संसद से उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।

अब सवाल ये है कि क्या इस्तीफा दे चुके जज के खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है? बता दें कि जस्टिस वर्मा राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज चुके हैं।

समिति की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

संसद में पेश रिपोर्ट में समिति ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों को सही माना है। सूत्रों के मुताबिक सरकार शीतकालीन सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही है। प्रस्ताव के दौरान जस्टिस वर्मा को अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया जाएगा।

ये पूरा मामला तब सामने आया था जब दिल्ली हाईकोर्ट में जज रहते हुए जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में जले हुए कैश बरामद हुए थे।

सबसे बड़ा पेंच: इस्तीफा दे चुके हैं जस्टिस वर्मा

जस्टिस वर्मा ने अप्रैल 2026 में ही राष्ट्रपति को इस्तीफा भेज दिया था, मगर उनका नाम अभी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों की सूची में है।

यहीं पर 1978 का सुप्रीम कोर्ट फैसला अड़चन बन रहा है। उस फैसले में कहा गया था कि जज का इस्तीफा सौंपते ही लागू हो जाता है, इसके लिए किसी मंजूरी की जरूरत नहीं। ऐसे में कानूनी सवाल उठ रहा है – पद छोड़ चुके जज के खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता है या नहीं? सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस संवैधानिक बिंदु पर राय ली जा रही है।

आगे क्या होगा?

  1. संसद में रिपोर्ट: 3 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट संसद में रखी जा चुकी है।
  2. महाभियोग की तैयारी: सरकार शीतकालीन सत्र में प्रस्ताव ला सकती है।
  3. कानूनी राय: इस्तीफे के बाद महाभियोग की वैधता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

FAQ: जस्टिस वर्मा दोषी करार

सवाल: जस्टिस यशवंत वर्मा पर क्या आरोप है?

दिल्ली हाईकोर्ट में जज रहते उनके सरकारी आवास से आग के बाद बड़ी मात्रा में जले हुए नोट बरामद हुए थे।

सवाल: 3 सदस्यीय समिति ने क्या कहा?

समिति ने जस्टिस वर्मा को दोषी माना है और संसद से उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।

सवाल: इस्तीफा देने के बाद भी महाभियोग हो सकता है क्या?

ये कानूनी पेच है। 1978 के SC फैसले के अनुसार इस्तीफा तुरंत लागू होता है। सरकार इसी पर कानूनी राय ले रही है।