furniture scam, former DPC and supplier sent to jail
furniture scam, former DPC and supplier sent to jail

school furniture scam: सरगुजा जिले के 15 साल पुराने स्कूल फर्नीचर घोटाले में EOW ने बड़ी कार्रवाई की है। साल 2010-11 में सरगुजा जिले में हुए 2.70 करोड़ के फर्नीचर खरीदी घोटाले में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय और सप्लायर संजय पटेल को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

आरोप है कि बिना फर्नीचर सप्लाई किए ही बिल बनाकर शासन को 67.15 लाख रुपये का चूना लगाया गया। वर्ष 2010-11 से संबंधित लगभग 15 वर्ष पुराने इस प्रकरण में विस्तृत विवेचना एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वर्तमान कार्रवाई की गई है। पूरी जांच में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अम्बिकापुर सत्यप्रकाश पाण्डेय (एस.पी. पाण्डेय) तथा संजय पटेल, संचालक मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन एवं आकृति प्रिंटिंग प्रेस, चोपड़ापारा, अम्बिकापुर, जिला सरगुजा की भूमिका सामने आई।

डेढ़ दशक पुरानी फाइल खुली

वर्ष 2010-11 में राजीव गांधी शिक्षा मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, अम्बिकापुर को अविभाजित सरगुजा जिले के सूरजपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज की पूर्व माध्यमिक शालाओं के लिए 2.70 करोड़ रुपये का फर्नीचर खरीदी आवंटन मिला था।

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तत्कालीन कलेक्टर और जिला मिशन संचालक के अनुमोदन के बाद CSIDC की दरों पर पंजीकृत फर्मों को क्रय आदेश जारी किए गए थे।

बिना सामान दिए बिल कर दिया पास

EOW की जांच में पता चला कि संजय पटेल द्वारा संचालित मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन और आकृति प्रिंटिंग प्रेस, चोपड़ापारा, अम्बिकापुर ने बड़ा खेल किया।

  1. सप्लाई नहीं हुई: दर्शन फेब्रिकेशन ने स्कूलों में फर्नीचर की वास्तविक आपूर्ति नहीं की।
  2. फर्जी बिलिंग: इसके बावजूद फर्नीचर सप्लाई दर्शाकर बिल तैयार कर शासन को प्रस्तुत किए गए।
  3. भुगतान ले लिया: उन्हीं बिलों के आधार पर सरकारी राशि निकाल ली गई।

जांच में पाया गया कि इस अनियमितता से शासन को कुल 67,15,814 रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

कमीशन का कनेक्शन: DPC को भी मिली रकम

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि संजय पटेल ने भुगतान में से अपना कमीशन काटने के बाद बची रकम तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय को दी।

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इसके सबूत भी EOW को मिले हैं। आरोप है कि दोनों ने आपसी षड्यंत्र और मिलीभगत से बिना सामान दिए बिलिंग और भुगतान की प्रक्रिया कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया।

और भी फर्में जांच के घेरे में

EOW ने बताया कि अन्य फर्नीचर आपूर्तिकर्ताओं द्वारा भी आपूर्ति में अनियमितता की गई और सत्यप्रकाश पाण्डेय ने उनसे भी कमीशन लिया। उनकी भूमिका, वास्तविक आपूर्ति और कमीशन की राशि को लेकर आगे की विवेचना जारी है।

किन धाराओं में केस, क्या हुई कार्रवाई

आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(D), 13(2) और IPC की धारा 120-B, 420, 409 के तहत केस दर्ज है।

आज EOW ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया:

  1. सत्यप्रकाश पाण्डेय उर्फ SP पाण्डेय – तत्कालीन DPC, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अम्बिकापुर
  2. संजय पटेल – संचालक, मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन एवं आकृति प्रिंटिंग प्रेस

दोनों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

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FAQ: फर्नीचर घोटाले में गिरफ्तारी

सवाल: फर्नीचर घोटाला क्या है?

2010-11 में सरगुजा में स्कूलों के लिए 2.70 करोड़ का फर्नीचर खरीदा गया था। बिना सामान दिए बिल बनाकर पैसा निकाल लिया गया।

सवाल: शासन को कितने का नुकसान हुआ?

जांच में 67 लाख 15 हजार 814 रुपये की आर्थिक क्षति पाई गई।

सवाल: कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

तत्कालीन DPC सत्यप्रकाश पाण्डेय और सप्लायर संजय पटेल।

सवाल: घोटाला कैसे हुआ?

मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन ने फर्नीचर सप्लाई नहीं की, फिर भी बिल बनाकर भुगतान ले लिया और कमीशन DPC को दिया।