टीआरपी डेस्क। सर क्रीक सेक्टर में किसी भी हरकत को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि, अगर इस सेक्टर पर पाकिस्तान की ओर से कोई हरकत की गई तो भारत उसका निर्णायक जवाब देगा। जो इतिहास और भूगोल दोनों बदल सकता है। बता दें, भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए रक्षा मंत्री पहुंचे थे। आइए जानते हैं भारत-पाकिस्तान के लिए सर क्रीक रेखा क्यों जरूरी हैं ?

क्या है सर क्रीक?

गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रांत की सीमा पर स्थित सर क्रीक लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। लगभग 96 किलोमीटर तक फैला यह दलदली इलाका कच्छ के रण से होकर अरब सागर में मिलता है। इस क्षेत्र में ‘सीरी’ मछली के पाए जाने के कारण इसका नाम सर क्रीक रखा गया। इसकी जलधारा को मूल रूप से ‘बान गंगा’ कहा जाता है। यह जलधारा पाकिस्तान के सिंध प्रांत को भारत के गुजरात से अलग करती हुई अरब सागर में गिरती है। दोनों देशों की आजादी से पहले यह एरिया ब्रिटिश भारत की बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा था। हालांकि, 1947 में बंटवारे के बाद से इस क्षेत्र पर अधिकार को लेकर मतभेद जारी हैं। 1968 में अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने कच्छ के रण का अधिकांश विवाद सुलझा दिया था, लेकिन सर क्रीक आज भी विवादित है।

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भारत का दावा है कि सीमा जलधारा के मध्य में तय होनी चाहिए, जिसे थलवेग सिद्धांत कहा जाता है। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि यह नियम नदियों पर लागू होता है, ज्वारीय मुहानों पर नहीं। पाकिस्तान 1914 के एक प्रस्ताव का हवाला देता है, जबकि भारत 1925 के मानचित्र और जलधारा में लगाए गए चिन्हों को सबूत मानता है।

आर्थिक दृष्टि से अहम है सर क्रीक

सर क्रीक का सैन्य महत्व भले ही सीमित हो, लेकिन आर्थिक दृष्टि से यह अहम है। यहां तेल और गैस के भंडार होने की संभावना जताई जाती है। साथ ही मछुआरों के लिए भी यह क्षेत्र संवेदनशील है, क्योंकि गलती से सीमा पार करने पर उन्हें अक्सर पकड़ लिया जाता है और लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है।

रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को दी सख्त चेतावनी

इसी बीच रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि, सर क्रीक में किसी भी प्रकार की हरकत का करारा जवाब दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि भारत ने बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश की है, लेकिन पाकिस्तान की नीयत साफ नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि, अगर पाकिस्तान ने सीमा से छेड़छाड़ की तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा कि “इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि, 1965 के युद्ध में भारतीय सेना ने लाहौर तक पहुंचने की क्षमता का प्रदर्शन किया था। आज 2025 में पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची जाने का एक रास्ता सर क्रीक से होकर गुजरता है।

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