नई दिल्ली। भारत और चीन (India-China) के शीर्ष सैन्य कमांडरों के बीच बहुप्रतीक्षित बातचीत सोमवार को चीनी क्षेत्र मोल्डो(Moldo) में होगी। एलएसी पर उत्पन्न तनाव के बाद यह छठवें दौर की लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत है। इस बार इसमें दोनों देशों की तरफ से विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। यह प्रतिनिधि संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी होंगे। सेना के सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

आपको बता दें कि बैठक सुबह 11 बजे मोल्डो में होगी। कोर कमांडर स्तर की पिछली बैठक दो अगस्त को हुई थी। इस प्रकार लंबे अरसे के बाद यह बैठक हो रही है। हालांकि बीच में ब्रिगेडियर स्तर की पांच बैठक हुई हैं। इस बीच दोनों देशों की सेनाओं के बीच फिर से झड़पें हो चुकी हैं और हवाई फायरिंग भी हो चुकी है। इस बीच भारत ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कई ऊंची चोटियों पर स्थिति मजबूत कर ली है।

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भारतीय सेना लद्दाख में 20 ऊंची चोटियों पर काबिज

भारतीय सेना पिछले कुछ वक्त में पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के निकट टकराव वाले क्षेत्रों के आसपास 20 ऊंची पहाड़ियों पर अपना कब्जा जमा चुकी है। सरकारी सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। चीन और भारत के बीच सोमवार को कोर कमांडर स्तर की छठवें दौर की वार्ता के पहले भारत की इस सामरिक बढ़त को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत ने बर्फीले मौसम के बीच चुशूल के इलाके में भी पिछले कुछ दिनों से अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, ताकि अपना प्रभुत्व कायम रखा जा सके। सूत्रों का कहना है कि सेना ने लद्दाख के सभी अग्रिम मोर्चों और संवेदनशील ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान सैनिकों की मौजूदा संख्या और हथियार बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम कर लिए हैं।

सर्दियों में यहां तापमान शून्य से 25 डिग्री तक नीचे चला जाता है। भारत ने पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पर सामरिक बढ़त वाली पहाड़ियों पर नियंत्रण के साथ फिंगर 2 और फिंगर 3 इलाके में सैन्य तैनाती और मजबूत की है। जबकि चीन ने फिंगर 4 से फिंगर 8 के बीच के इलाके पर नियंत्रण कर रखा है।

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